वास्तु उपाय: बच्चों के खिलौने उनके बचपन का अहम हिस्सा होते हैं, लेकिन जब ये खिलौने टूट जाते हैं तो अक्सर हम उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. कोई उन्हें घर के कोने में रख देता है, तो कोई बिना सोचे-समझे दान कर देता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार यह छोटी सी बात भी घर की ऊर्जा और बच्चों के माहौल पर असर डाल सकती है. इसलिए टूटे खिलौनों को लेकर सही तरीका अपनाना जरूरी माना जाता है.
क्यों नहीं रखने चाहिए टूटे खिलौने?
वास्तु के अनुसार घर में रखी हर चीज सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित करती है. टूटे हुए खिलौने नकारात्मकता बढ़ाने का कारण बन सकते हैं. खासकर बच्चों के कमरे में ऐसी चीजें रहने से उनका ध्यान भटक सकता है. इसलिए इन्हें लंबे समय तक संभालकर रखना सही नहीं माना जाता.
दान करने से पहले रखें ध्यान
आमतौर पर लोग बच्चों के पुराने या टूटे खिलौनों को जरूरतमंदों को दे देते हैं. यह अच्छी बात है, लेकिन ध्यान रखना जरूरी है कि बहुत ज्यादा टूटे या खतरनाक खिलौने दान में न दें. ऐसे खिलौने जिनसे किसी को चोट लग सकती है, उन्हें देने से बेहतर है कि उन्हें घर से बाहर कर दिया जाए. दान हमेशा ऐसे खिलौनों का करें जो इस्तेमाल करने लायक और सुरक्षित हों.
सही समय का रखें ध्यान
वास्तु मान्यताओं के अनुसार पुराने खिलौनों या बेकार सामान को हटाने के लिए बुधवार, गुरुवार और रविवार का दिन शुभ माना जाता है. इन्हें सुबह या दोपहर के समय घर से बाहर करना बेहतर होता है. रात के समय टूटी वस्तुओं को बाहर निकालना या दान करना उचित नहीं माना जाता.
किस दिशा में न रखें टूटे खिलौने?
अगर किसी कारण से तुरंत खिलौनों को बाहर करना संभव न हो, तो उन्हें सही जगह पर रखना भी जरूरी है. कोशिश करें कि टूटे खिलौनों को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में न रखें.
बच्चों की स्टडी टेबल या पढ़ाई की जगह पर इन्हें बिल्कुल न रखें
पूजा स्थल के आसपास रखने से बचें, इससे नकारात्मकता बढ़ सकती है
इन्हें स्टोर रूम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में अस्थायी रूप से रखा जा सकता है
बच्चों पर पड़ता है असर
बच्चों का वातावरण उनके व्यवहार और सोच पर असर डालता है. अगर उनके आसपास साफ-सुथरा और व्यवस्थित माहौल होता है, तो उनका मन भी सकारात्मक रहता है. वहीं टूटे-फूटे और बेकार सामान से भरा कमरा उनके ध्यान और ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है.
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