साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे माइउंग रविवार को भारत के तीन दिन के दौरे पर आए. उनके साथ फर्स्ट लेडी किम हे क्युंग और एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी है जिसमें मंत्री, बड़े अधिकारी और बिजनेस लीडर शामिल हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनसे मुलाकात की और सोमवार को वो PM नरेंद्र मोदी से मिलेंगे. इस दौरे में जहाज बनाने से लेकर AI, सेमीकंडक्टर और रक्षा तक कई बड़े समझौते होने की उम्मीद है.
भारत और साउथ कोरिया के बीच ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ है. यानी ये दोनों देश सिर्फ व्यापार नहीं करते बल्कि रक्षा, टेक्नोलॉजी और कई दूसरे अहम मामलों में भी एक साथ काम करते हैं. पिछले कई सालों में दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं.
2010 में दोनों देशों के बीच CEPA यानी एक बड़ा व्यापार समझौता हुआ था जिसके बाद से व्यापार काफी बढ़ा है. 2024 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 25.1 अरब डॉलर यानी करीब 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का था.
इस दौरे का मकसद क्या है?
साउथ कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वि सुंग-लाक ने सियोल में बताया कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होगा. खासतौर पर इन क्षेत्रों में बड़े कदम उठाए जाएंगे.
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जहाज बनाना और समुद्री उद्योग, AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा यानी हथियार और सैनिक सहयोग और वित्त यानी बैंकिंग और निवेश के क्षेत्र में.
उन्होंने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से दुनिया में एनर्जी सप्लाई चेन पर खतरा मंडरा रहा है. दोनों देश मिलकर इस पर नजर रखेंगे और एक दूसरे की मदद करेंगे.
सोमवार को PM मोदी से मुलाकात
सोमवार को राष्ट्रपति ली और PM मोदी के बीच बड़ी बैठक होगी. इसमें कई अहम विषयों पर बात होगी जैसे जहाज बनाने का क्षेत्र जिसमें साउथ कोरिया दुनिया में नंबर एक है, व्यापार और निवेश बढ़ाना, AI और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जो आज की दुनिया में सबसे जरूरी है, रक्षा और हथियार उद्योग में सहयोग और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध मजबूत करना. बैठक के बाद PM मोदी साउथ कोरियाई राष्ट्रपति के सम्मान में लंच की मेजबानी करेंगे.
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