क्या आपके बच्चे भी स्कूल बैग में केवल 4 चीजें भरकर लेकर जाते हैं. भारत में सुबह-सुबह स्कूल जा रहे बच्चों का नजारा एक जैसा ही होता है. अपने से ज्यादा हैवी बैग पीठ पर लेकर स्कूल जाते हैं. इस बीच एक सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या दुनिया के हर कोने में पढ़ाई का तरीका यही है? अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय महिला सोनल चौधरी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपने बेटे के स्कूल बैग को दिखाया है जिसने भारत में एक नई चर्चा शुरू कर दी है. उन्होंने दिखाया कि अमेरिका में बच्चे बैग में क्या लेकर जाते हैं?

ये चार चीजें लेकर जाते हैं बच्चे

सोनाली ने स्कूल से आए अपने बच्चे का बैग जब खुलवाया तो लोग हैरान रह गए. उसके बैग में ऐसी कोई चीज नहीं थी जो बच्चों को बोझ के तले दबाएं. उसके बैग में केवल पानी की बोतल, टिफिन बॉक्स, एक फोल्डर और लाइब्रेरी से लाई हुई बुक थी.

बुक नहीं तो कैसे होती है पढ़ाई?

वीडियो देखने के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि अगर अमेरिका के बच्चों के बैग में किताबें नहीं हैं तो वह पढ़ाई कैसे करते हैं? सोनाली ने बताया कि यहां पर डेस्क बॉक्स कल्चर है. बच्चे अपनी किताबें स्कूल में ही रखते हैं. वे जब स्कूल जाते हैं, तो वहां के बॉक्स से किताब और कॉपियां निकालते हैं पढ़ाई करते हैं और फिर उसे वहीं छोड़ आते हैं. उन्हें किसी तरह के होमवर्क का टेंशन भी नहीं होता है. इसके अलावा उन्हें पढ़ाई के लिए आईपैड भी मिलता है.

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सोनाली ने शेयर किया अपना एक्सपीरियंस

वीडियो में सोनाली ने अपने स्कूल टाइम का एक्सपीरियंस भी शेयर किया. उन्होंने कहा कि वह तो अपने टाइम पर 4 से 5 किलो का बैग लेकर जाती थीं. सोनाली ने कहा कि हो सकता है अब भारत में भी कुछ बदलाव आया हो. लेकिन उनके कमेंट सेक्शन में भारतीय मूल के पेरेंट्स ने अलग ही प्रतिक्रिया दी.

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