संसद में फेल हुआ बिल, कैंपस में गुस्सा! DU की प्रधानाचार्यों का विपक्ष पर सीधा हमला – women reservation bill fails in lok sabha delhi politics heats up edmm


नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) के लोकसभा में गिरने के बाद दिल्ली की सियासत अब कॉलेजों की दहलीज तक पहुंच गई है. सोमवार को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की दो दिग्गज शिक्षाविदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए इसे भारत की महिलाओं के साथ विश्वासघात करार दिया. गौरतलब है कि पिछले हफ्ते यह संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण पारित नहीं हो सका था.

बीजेपी बोली- साजिश के तहत गिराया गया बिल
बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और समाजवादी पार्टी पर एकजुट होकर बिल को हराने का आरोप लगाया. सचदेवा ने दावा किया कि इन पार्टियों की महिला कार्यकर्ता भी अपने नेतृत्व के फैसले से बेहद नाखुश हैं. उन्होंने कहा कि जो पार्टियां परिवारवाद से ऊपर नहीं उठ पा रही हैं, वे महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने के पक्ष में कभी नहीं रही हैं.

हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल रमा शर्मा ने इस नतीजे पर गहरा दुख जताया. उन्होंने सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि बेटी को बचाया गया, बेटी को पढ़ाया भी गया लेकिन जब उसे राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की बारी आई, तो विपक्ष ने अपने कदम पीछे खींच लिए.

वहीं, भगिनी निवेदिता कॉलेज की प्रिंसिपल रूबी मिश्रा ने बताया कि उनके कॉलेज की छात्राएं बिल के फेल होने से काफी आहत हैं. उन्होंने विपक्ष के उस तर्क को चुनौती दी जिसमें आरक्षण को ‘परिसीमन’ (Delimitation) से जोड़ा जा रहा है. रूबी मिश्रा ने कहा कि दोनों मुद्दों को अलग-अलग सुलझाया जा सकता है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संसद में अभी सिर्फ 14 प्रतिशत महिलाएं हैं और उनमें से भी अधिकतर राजनीतिक परिवारों से हैं, इसलिए इस सुधार की तुरंत जरूरत है.

आखिर क्यों हुआ विरोध?
विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे ‘परिसीमन’ से जोड़ना दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए खतरा हो सकता है. साथ ही विपक्ष ‘ओबीसी (OBC) सब-कोटा’ की मांग पर भी अड़ा है. विपक्ष का तर्क है कि बिना इसके यह बिल समाज के हर वर्ग की महिलाओं को न्याय नहीं दे पाएगा.

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