पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खाते में सिर्फ चुनावी वादे, चौंकाते हैं बेरोजगारी के ये आंकड़े – Political Parties manifesto spotlight women job market different ntc rmxk


पश्चिम बंगाल में वोटिंग की तारीख नजदीक आ चुकी है. 23 अप्रैल को पहले फेज और 29 अप्रैल को दूसरे फेज की वोटिंग होगी. 4 मई को नतीजे आएंगे. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही मुख्य मुकाबला है. हालांकि दूसरी पार्टियां भी पूरा जोर लगा रही हैं. महिला आरक्षण संशोधन बिल पर सियासी बवाल के बीच टीएमसी और बीजेपी ने अपने घोषणापत्रों में महिलाओं से जुड़े वादों को फोकस में रखा है.

हालांकि, आंकड़े कुछ अलग ही तस्वीर बयां करते हैं. राज्य में महिलाओं में बेरोजगारी सियासी दलों के दावे से काफी अलग है. साल 2022 के बाद से स्थिति और खराब हुई है.

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. 2023 में राज्य ने राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया, जहां बेरोजगारी दर 8.1 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 10 फीसदी थी. लेकिन 2025 तक यह ट्रेंड बदल गया. राज्य की बेरोजगारी दर बढ़कर 10.6 प्रतिशत हो गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 9.9 प्रतिशत रहा.

यह ट्रेंड हर जगह समान नहीं है. बंगाल में युवाओं (मेल) में बेरोजगारी दर 2022 में 9.3 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर 7.7 प्रतिशत हो गई, लेकिन 2025 में फिर बढ़कर 10.2 प्रतिशत पहुंच गई. वहीं, युवा महिलाओं में यह वृद्धि अधिक तेज रही. 2024 में 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 11.9 फीसदी तक पहुंच गई. 2025 में इसमें केवल 0.2 प्रतिशत की मामूली कमी आई.

आंकड़े बताते हैं कि बेरोजगारी का सबसे अधिक असर अशिक्षितों पर नहीं पड़ता, बल्कि शिक्षित वर्ग खासकर महिलाओं पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है. कम या बिना शिक्षा वाले लोगों में बेरोजगारी अपेक्षाकृत कम है, लेकिन एजुकेशन के बढ़ते लेवल के साथ यह बढ़ती जाती है.

यह अंतर विशेष रूप से पोस्टग्रेजुएट लेवल स्तर पर स्पष्ट है, जहां पुरुषों में बेरोजगारी दर 2.9 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं में यह 15.4 प्रतिशत है. ग्रेजुएट लेवल पर भी ऐसा ही अंतर देखने को मिलता है. 2023-24 में पुरुषों की बेरोजगारी दर 7.1 प्रतिशत थी, जबकि महिलाओं की 12.5 फीसदी थी.

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, जन शिक्षण संस्थान और नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम जैसे स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम की शुरुआत के बावजूद शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई अभी भी काफी चौड़ी बनी हुई है.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *