Baglamukhi Mata: हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी जयंती मनाई जाती है. साल 2026 में मां बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को पड़ रही है. यह दिन तंत्र साधना और मां की विशेष कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मां बगलामुखी, जिन्हें पीताम्बरा और ब्रह्मास्त्र विद्या भी कहा जाता है, अपने विशिष्ट स्वरूप के लिए जानी जाती हैं. उनके चित्रों और मूर्तियों में मां को एक असुर की जीभ खींचते हुए दिखाया जाता है. आइए जानते हैं आखिर क्या है इस रहस्यमयी स्वरूप की कहानी और जयंती का विशेष महत्व.
जब मदन असुर की वाणी बनी थी विनाश का कारण
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में एक बार पूरे ब्रह्मांड को नष्ट करने वाला भीषण तूफान उठा. उसी दौरान मदन नाम का एक असुर हुआ जिसने कठिन तपस्या से वाक् सिद्धि प्राप्त की थी. वह जो बोलता, वह सच हो जाता. अपनी शक्ति के अहंकार में आकर मदन असुर ने देवताओं को सताना शुरू कर दिया और अपनी जुबान से विनाशकारी आपदाएं पैदा करने लगा. सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने महाशक्ति की आराधना की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर वैशाख शुक्ल अष्टमी को सौराष्ट्र की हरिद्रा झील से सुनहरी आभा लिए हुए मां बगलामुखी प्रकट हुईं.
जीभ खींचने का रहस्य: क्या है स्तंभन शक्ति?
मां बगलामुखी को तंत्र शास्त्र में स्तंभन की देवी कहा जाता है. स्तंभन का अर्थ होता है किसी भी गतिशील वस्तु या विचार को जड़ या स्थिर कर देना.
वाणी पर प्रहार: जब मां का सामना मदन असुर से हुआ, तो उन्होंने उसकी जीभ पकड़कर उसे स्तंभित कर दिया. यह इस बात का प्रतीक है कि जब बुराई अपनी चरम सीमा पर हो, तो उसकी अभिव्यक्ति को रोकना सबसे जरूरी है.
कुतर्कों का अंत: जीभ पकड़ना इस बात का संकेत है कि मां शत्रु की बुद्धि और बोलने की शक्ति को जड़ कर देती हैं, जिससे वह भक्त के विरुद्ध कोई भी नया षड्यंत्र नहीं रच पाता.
गदा से वध: असुर को खामोश करने के बाद मां ने अपनी गदा से उसका संहार किया.
24 अप्रैल 2026: जयंती का महत्व और पूजन
24 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली मां बगलामुखी जयंती पर मां के पीले स्वरूप की पूजा की जाती है. मां को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, जो तेज और एकाग्रता का प्रतीक है. पूजन में हल्दी, पीले फूल और पीले वस्त्रों का उपयोग अनिवार्य है.
मान्यता है कि इस दिन जो भक्त श्रद्धापूर्वक मां की उपासना करता है, उसके जीवन से गुप्त शत्रुओं का नाश होता है और कोर्ट-कचहरी जैसे विवादों में उसे जीत हासिल होती है.
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