मछली बंगाल की पहचान है. बंगाल का नाम लेते ही मन में जो कई ख्याल आते हैं मछली उनमें से एक है. बंगाल में इस विधानसभा चुनाव में कई मुद्दों में मछली खाना भी एक मुद्दा है. बीजेपी के बड़े नेता अनुराग ठाकुर बंगाल में मछली खा रहे हैं. पूर्व सीएम चंपई सोरेन ने मछली खाते हुए अपनी तस्वीर एक्स पर पोस्ट की है. पूर्व विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला मछली खा रहे हैं.
आखिर बंगाल में बीजेपी की ‘फिश पॉलिटिक्स’ क्या है? क्यों बीजेपी नेता न सिर्फ मछली खा रहे हैं बल्कि दुनिया को बता भी रहे हैं कि वे मछली खा रहे हैं.
माछेर-भातेर बंगाली
दरअसल टीएमसी इस चुनाव में बंगाल के सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है. टीएमसी बीजेपी पर आरोप लगा रही है कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो बंगालियों को मछली, मीट और अंडा खाने से रोक दिया जाएगा. ममता बनर्जी की टीएमसी इसे काउंटर करते हुए कहती हैं कि ‘माछ-भाते बंगाली’ यानी कि मछली-भात बंगाली की पहचान है.
लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहीं ममता ने चेतावनी दी है कि BJP बंगाल की जीवन शैली के लिए खतरा है. उन्होंने मछली और चावल को बंगाल के लोगों के लिए ऐसी चीज़ें बताया, जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता.
हाल ही में एक चुनावी सभा में ममता ने कहा, “BJP आपको मछली खाने नहीं देगी. न ही वे आपको मांस या अंडे खाने देंगे.”
एक दूसरी सभा में BJP पर हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “बंगाल के लोग मछली और चावल पर जीते हैं. आप बंगाल के लोगों से कह रहे हैं कि वे मछली नहीं खा सकते, मांस नहीं खा सकते, अंडे नहीं खा सकते, तो फिर वे खाएंगे क्या?”
ममता कहती हैं कि बीजेपी बंगाली संस्कृति पर हमला कर रही है, बाहर से थोप रही है शाकाहारी संस्कृति.
बीजेपी उम्मीदवारों के हाथ में मछली
इसी आरोप का जवाब देने के लिए बीजेपी ने बंगाल में बड़े लेवल पर ‘फिश पॉलिटिक्स’ शुरू किया है. बीजेपी नेता और उम्मीदवार खुलकर मछली खा रहे हैं, हाथ में बड़ी-बड़ी मछली लेकर प्रचार कर रहे हैं और मछली बाजारों में घूम रहे हैं.
कोलकाता पोर्ट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राकेश सिंह दोनों हाथों में मछली लेकर घर-घर घूम रहे हैं.
यही हाल कौस्तव बागची का है. बागची हाथ में मछली लिए चटक सफेद और लाल कपड़े पहनकर घर-घर जा रहे हैं.
उनके पीछे ढोल बज रहे हैं और समर्थक उनकी जयकार कर रहे हैं. बैरकपुर से BJP के उम्मीदवार बागची लोगों को रिझाने के लिए मछली पर भरोसा कर रहा है.
बंगाल में शाकाहारी छवि से मुक्ति की कोशिश
बीजेपी की इस तमाम कोशिश का मकसद ‘बाहरी’, ‘हिंदी थोपने वाली’ और ‘शाकाहारी’ पार्टी की छवि से मुक्त करना है. और बंगाली मतदाताओं को दिखाना कि बीजेपी उनकी संस्कृति, भाषा और खान-पान का सम्मान करती है.
बंगाल चुनाव के दौरान झारखंड के पूर्व सीएम चंपई सोरेन का मछली खाते हुए तस्वीर एक्स पर पोस्ट करना. अनुराग ठाकुर का मछली खाते हुए वीडियो जारी करना इसी कोशिश का हिस्सा है.
अनुराग ठाकुर ने मछली खाने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, “यहां माछ भी है, मछली भी है, भात भी है, सब खा रहे हैं, भाजपा की 16 राज्यों में सरकार है, NDA की 20 राज्यों में सरकार है, मगर एक भी जगह किसी के बोलने पर, खाने पर, पूजा पर कोई प्रतिबंध नहीं है. लेकिन ममता बनर्जी के पास 15 साल की कोई उपलब्धि नहीं है इसलिए भय, भ्रम और अफवाहें फैलाने का काम कर रही हैं.”
पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने भी कोलकाता में माछ-भात खाते हुए कहा कि मेरा पसंदीदा खाना मछली है. और मुझे हर तरह की मछली पसंद है, चाहे वह चिंगड़ी हो, मांगुर मछली हो, पाबदा हो, रोहू हो या कतला. मेरा मुख्य मुद्दा यह है कि यह बड़े अफसोस की बात है कि बंगाल के पास समुद्र, नदियां और तालाब सब कुछ होने के बावजूद यहां मछली पालन का कोई ऐसा उद्योग नहीं है जो सचमुच में कुछ खास मायने रखता हो.”
बंगाल चुनाव में मछली का मुद्दा इतना अहम हो गया है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे को छुआ. पीएम ने एक रैली में कहा, “सत्ता में 15 साल बिताने के बाद भी तृणमूल कांग्रेस आपको मछली जैसी बुनियादी चीज भी उपलब्ध कराने में नाकाम रही है. यहां तक कि मछली भी राज्य के बाहर से मंगवानी पड़ती है.”
BJP के लिए यह चुनाव न सिर्फ़ जीतने के बारे में है, बल्कि ‘बाहरी’ होने की धारणा को तोड़ने के बारे में भी है मछली इसका एक अहम हिस्सा है.
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय और वर्ल्ड फिश द्वारा किए गए एक संयुक्त सर्वे के मुताबिक बंगाल में 65 प्रतिशत से ज़्यादा लोग हर हफ़्ते मछली खाते हैं. इस लिहाज से बंगाल में भारत की सबसे बड़ी मछली खाने वाली आबादी में से एक है. और BJP इस बात की अहमियत जानती है.
बंगाल में प्रथम चरण के मतदान के लिए मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार खत्म हो गया है. यहां 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. मतगणना 4 मई को होगी.
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