ममता बनर्जी के लिए अंतिम घड़ी आ चुकी है और पार्टी की स्थिति अब चिंता का कारण बन गई है. अब चिल्लाने और विरोध करने से कोई फायदा नहीं होगा। पार्टी का नियंत्रण एंटी सोशल तत्वों के हाथ में चला गया है. प्रशासन में मौजूद भ्रष्ट लोग ही सारी गड़बड़ी कर रहे हैं, जिसके कारण इन भ्रष्टाचारियों की विदाई निश्चित लग रही है. इस परिस्थिति में बदलाव अनिवार्य हो गया है और जनता भी बदलाव की उम्मीद रखती है.



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