Tariff Refund Process: खुल गई ट्रंप टैरिफ रिफंड विंडो, 166 अरब डॉलर करने होंगे वापस… भारत को मिलेगा इतना – Tariff refunds released Americans importer getting their tariff refunds india amount tuta


अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के फैसले को झटका देते हुए बीते महीने टैरिफ को रद्द कर दिया था. साथ ही कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को आदेश दिया था कि अभी तक टैरिफ के तौर पर जो टैक्स वसूले गए हैं, उसे भी वापस किया जाए.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रिफंड की प्रक्रिया 20 अप्रैल से शुरू हो गई है, और अनुमान लगाया गया है कि कुल 166 अरब डॉलर रिफंड किए जाएंगे. इसी कड़ी में अब अमेरिकी सरकार ने उन आयातकों के लिए क्लेम करने की प्रक्रिया खोल दी है, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन के दौरान ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत टैरिफ का भुगतान किया था. करीब 3,30,000 अमेरिकी व्यवसायों ने 5.3 करोड़ से अधिक शिपमेंट पर यह शुल्क चुकाया था, जो कि अब रिफंड के लिए पात्र हैं.

लेकिन रिफंड का प्रोसेस ऑटोमैटिक नहीं है. कंपनियों को इसके लिए आवेदन करना होगा. उम्मीद है कि मंजूरी मिलने के बाद 60 से 90 दिनों के भीतर (मई से जुलाई 2026 के बीच) भुगतान मिलना शुरू हो जाएगा. खास बात यह है कि रिफंड सीधे अमेरिकी नागरिकों या उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा. यह पैसा केवल उन आयातकों और कंपनियों को वापस किया जा रहा है, जिन्होंने मूल रूप से यह शुल्क सरकार को दिया था.

भले ही कंपनियों को अरबों डॉलर वापस मिल रहे हों, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आम उपभोक्ताओं को इसका तत्काल लाभ मिलने की संभावना कम है.

भारत को कितना मिल सकता है रिफंड?

अगर भारत की बात करें तो अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स को रिफंड के तौर करीब 10 से 12 अरब डॉलर तक का फायदा हो सकता है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कोर्ट के टैरिफ आदेश के रद्द होने के बाद अमेरिका में 166 अरब डॉलर के टैरिफ रिफंड का रास्ता साफ हो गया है.

हालांकि यह रिफंड सीधे भारतीय एक्सपोर्ट्स के बैंक खातों में नहीं आएगा. नियमों के अनुसार, रिफंड क्लेम केवल अमेरिकी इंपोर्टर्स ही दाखिल कर सकते हैं. भारतीय एक्सपोटर्स को इस रिफंड के लिए अपने अमेरिकी बायर्स के साथ उन ट्रेड को लेकर बातचीत करनी होगी. जब दोनों के बीच रिबेट शेयरिंग पर सहमति बन जाएगी, तो फिर भारतीय एक्सपोर्टर के अकाउंट में पैसा आ पाएगा. खासकर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और केमिकल्स सेक्टर को इसका लाभ मिलने वाला है.

बता दें, कई कंपनियों ने पिछले वर्ष टैरिफ के कारण भारी नुकसान झेला है. वे इस रिफंड का उपयोग अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने और पुराने घाटे को पाटने में करेंगी. वहीं एक तरफ पुराना रिफंड मिल रहा है, तो दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन ने नए नियमों के तहत लगभग सभी आयातों पर 10% टैरिफ लगा दिया है, ये नए खर्च पुराने रिफंड से होने वाले फायदे को खत्म कर रहे हैं.

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *