69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के सब्र का बांध आज एक बार फिर टूट गया. उम्मीदवारों ने आज अचानक सैकड़ो की संख्या में अभ्यर्थी विधानसभा घेराव करने पहुंचे. इस दौरान पुलिस के साथ भी उनकी नोकझोंक हो गई. उम्मीदवार इस दौरान गले में झाड़ू और मटकी लटका कर वहां पहुंचे. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप सरकार दलित और पिछड़ों को आगे नहीं बढ़ाना चाहती. सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की तरफ से वकील नहीं खड़ा हो रहा जिसकी वजह से इस मामले की पैरवी नहीं हो पा रही है.
विधानसभा घेराव करने पहुंचे अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेजा गया. अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और सुप्रीम कोर्ट में कमजोर पैरवी के कारण सालों से उनकी भर्ती रुकी हुई है. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है.
साल 2020 से चल रहा है मामला
अभ्यर्थियों के धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप और धनंजय गुप्ता का कहना है कि यह मामला लखनऊ हाई कोर्ट में साल 2020 से चल रहा है. इस भर्ती में ओबीसी कैटेगरी को 27 प्रतिशत की जगह केवल 3.68 प्रतिशत और एससी कैटेगरीो को 21 प्रतिशत की जगह केवल 16.2 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है. इतनी ही नहीं लखनऊ हाई कोर्ट डबल बेंच 13 अगस्त 2024 को इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट रद्द कर चुकी है.
पहली बार नहीं हुआ है विरोध
यह कोई पहला मौका नहीं है जब लखनऊ की सड़कों पर इस भर्ती को लेकर बवाल हुआ है. इस मामले में विरोध प्रदर्शन पहले भी हो चुके हैं.
दिसंबर 2021-जनवरी 2022- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हजारों उम्मीदवारों ने लखनऊ में विरोध प्रदर्शन किया था. इसी भारी विरोध के बाद सरकार ने माना था कि आरक्षण प्रक्रिया में कुछ गलतियां हुई हैं और 6,800 पदों की नई सूची जारी की गई थी.
मई – जून 2023: चिलचिलाती धूप में अभ्यर्थियों ने महीनों तक ईको गार्डन में धरना पर बैठे थे.इस दौरान पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन करने की तस्वीरें पूरे देश में वायरल हुई थीं.
अगस्त 2024: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के एक बड़े फैसले के बाद विरोध फिर शुरू हुआ, जिसमें कोर्ट ने पूरी मेरिट लिस्ट को दोबारा बनाने का आदेश दिया था. इसके बाद अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया था.
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