अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का फायदा अगर किसी को हो रहा है तो वो चीन है जिसमें उसकी शिपिंग कंपनियां भी शामिल हैं. युद्ध की वजह से तेल-गैस की सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है. होर्मुज के बंद होने से कच्चे तेल की ढुलाई में बहुत मुश्किलें आ रही हैं और वैश्विक स्तर पर बड़े तेल टैंकरों की मांग बढ़ गई है क्योंकि आयातक एक ही बार में बड़े पैमाने पर तेल मंगा लेना चाहते हैं. इसका सीधा फायदा चीन को हो रहा है क्योंकि चीन की शिपबिल्डिंग कंपनियों को नए ऑर्डर मिल रहे हैं.

होर्मुज पर ईरान की नाकाबंदी और फिर ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी के कारण दुनिया भर की शिपिंग कंपनियां अपनी क्षमता बढ़ाने की होड़ में हैं. खासतौर पर वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) की मांग तेजी से बढ़ी है, जो एक बार में करीब 20 लाख बैरल तेल ले जा सकते हैं.

नए ऑर्डरों की यह बाढ़ ऐसे समय आई है जब वैश्विक शिपिंग पर भारी दबाव है. होर्मुज स्ट्रेट पिछले आठ हफ्तों से काफी हद तक बाधित है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं. टैंकर अब फारस की खाड़ी से गुजरने के रिस्क से बचने के लिए लंबे रास्ते अपना रहे हैं, जिससे पहले से सीमित जहाजी बेड़े पर और दबाव बढ़ गया है.

इस संकट ने चीनी शिपबिल्डर्स के लिए नए मौके पैदा किए हैं. चीन के पास इस क्षेत्र में मजबूत उत्पादन क्षमता है और वो कम लागत में बहुत तेजी से बड़े कार्गो शिप की डिलीवरी भी कर सकता है जिससे इस क्षेत्र में उसे अन्य देशों पर बढ़त मिल रही है.

चीन को धड़ाधड़ मिल रहे बड़े जहाजों के ऑर्डर

हाल के हफ्तों में कम से कम दो स्विस कंपनियों और एक सिंगापुर की कंपनी ने चीनी शिपयार्ड्स को VLCC बनाने के ऑर्डर दिए हैं.

स्विट्जरलैंड की एडवांटेज टैंकर्स, जो लंबे समय से दक्षिण कोरियाई शिपयार्ड्स पर निर्भर थी, उसने चीन में दो 3,07,000 डेडवेट टन क्षमता वाले VLCC का ऑर्डर दिया है. इन जहाजों की डिलीवरी 2028 और 2029 में होगी.

इस बीच, जिनेवा स्थित मर्कुरिया एनर्जी ग्रुप, जो दुनिया के प्रमुख स्वतंत्र कमोडिटी ट्रेडर्स में से एक है, ने चीन में करीब 65 करोड़ अमेरिकी डॉलर के जहाज निर्माण कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए हैं. इस ऑर्डर में कम से कम चार VLCCs और दो LR2 प्रोडक्ट टैंकर शामिल हैं, जिनकी डिलीवरी 2029 तक होने की उम्मीद है.

सिंगापुर स्थित यांगजिजियांग मैरीटाइम डेवलपमेंट, जिसे चीनी शिपबिल्डिंग उद्योगपति रेन युआनलिन का सपोर्ट है, ने आठ VLCCs का ऑर्डर दिया है. कंपनी फाइलिंग्स के अनुसार, बड़े टैंकर सेगमेंट में यह उसका पहला कदम है और इन जहाजों की डिलीवरी 2028 से 2030 के बीच तय की गई है.

मौजूदा प्रोजेक्ट्स को भी मिल रहा फायदा

चीन के मौजूदा प्रोजेक्ट्स को भी युद्ध का फायदा मिल रहा है. स्विट्जरलैंड की एडवांटेज टैंकर्स का 3,19,000 डेडवेट टन क्षमता वाला VLCC ‘एडवांटेज विजुअल’ पहले से ही जियांगसू प्रांत के एक शिपयार्ड में बन रहा है, जिसकी डिलीवरी इस साल की चौथी तिमाही में होने की उम्मीद है.

चाइना शिप सर्वे के अनुसार, कमोडिटी ट्रेडर ट्रैफिगुरा से करीब 11.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर में खरीदा गया यह जहाज अब लगभग 15.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आंका जा रहा है.

बढ़ती मांग के साथ भाड़े की कीमतों में भी भारी उछाल आया है. VesselValue के अनुसार, पिछले हफ्ते VLCCs की दैनिक चार्टर दरें बढ़कर करीब 2,34,700 अमेरिकी डॉलर पहुंच गईं, जो पिछले हफ्ते की तुलना में 3.4 प्रतिशत ज्यादा हैं.

चीन का शिपिंग उद्योग अब वैश्विक जहाज निर्माण ऑर्डरों पर दबदबा बना चुका है और उसने दक्षिण कोरिया जैसे स्थापित खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है. क्लार्कसन रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल दुनिया के लगभग दो-तिहाई कॉन्ट्रैक्ट चीन को मिले, जबकि दक्षिण कोरिया की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रही.

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