ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर टोल वसूली की चर्चा के बीच अब दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में शामिल स्ट्रेट ऑफ मलक्का या कहें मलक्का स्ट्रेट को लेकर भी नई बहस छिड़ गई है. इंडोनेशिया ने यहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने का सुझाव दिया है.
इंडोनेशिया के वित्त मंत्री पुरबाया युधि सादेवा ने हाल ही में कहा कि मलक्का स्ट्रेट से रोजाना बड़ी संख्या में जहाज गुजरते हैं, लेकिन उनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाता. उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह इतना अहम ट्रेड रूट है, तो क्या यहां टोल नहीं होना चाहिए? उनका सुझाव था कि अगर टैक्स लगाया जाए, तो उससे होने वाली कमाई इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच बांटी जा सकती है.
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हालांकि, इस प्रस्ताव पर सिंगापुर की तरफ से तुरंत प्रतिक्रिया आई. सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियान बालाकृष्णन ने साफ कहा कि यह रास्ता हमेशा खुला और फ्री रहना चाहिए. उन्होंने कहा, “हम किसी भी ऐसी कोशिश का हिस्सा नहीं बनेंगे, जिसमें इस रास्ते पर टोल लगाया जाए या जहाजों की आवाजाही पर रोक लगे.”
बिना किसी फीस के स्ट्रेट से गुजरते हैं जहाज
सिंगापुर के मंत्री ने यह भी बताया कि सिंगापुर, मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच पहले से एक समझौता है, जिसके तहत जहाज बिना किसी शुल्क के इस रास्ते से गुजरते हैं. यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है क्योंकि तीनों देश व्यापार पर निर्भर हैं और उनके लिए यह जरूरी है कि समुद्री रास्ते खुले रहें.
मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है. यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ता है और एशिया की ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भी हाल ही में कहा था कि पूर्वी एशिया के करीब 70% ऊर्जा और व्यापार इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसमें सुंडा और मकासर स्ट्रेट भी शामिल है.
अगर टोल लगा तो बढ़ेगी शिपिंग की लागत
यही वजह है कि इस स्ट्रेट को लेकर किसी भी तरह का बदलाव पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यहां टोल लगाया गया, तो इससे शिपिंग लागत बढ़ेगी, जिसका असर सीधे तेल और दूसरे सामानों की कीमतों पर पड़ेगा.
इस पूरे विवाद की जड़ होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रही बहस है, जहां ईरान की तरफ से जहाजों पर नियंत्रण और टोल लगाने का प्रस्ताव पेश किया है. कई मौकों पर जहाजों से टोल की वसूली भी की गई है. अब डर यह है कि कहीं दूसरे अहम समुद्री रास्तों पर भी इसी तरह के संकट न पैदा हो जाएं.
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मलक्का स्ट्रेट पर सिंगापुर का रुख स्पष्ट
सिंगापुर ने साफ कर दिया है कि वह “फ्री नेविगेशन” यानी बिना रोक-टोक आवाजाही के सिद्धांत पर कायम रहेगा. देश के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि यह सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार का मामला है, इसलिए इसे सीमित नजरिए से नहीं देखा जा सकता.
मसलन, मलक्का स्ट्रेट को लेकर देशों के बीच मतभेद सामने आ गए हैं. एक तरफ जहां इंडोनेशिया इसे आर्थिक मौके के तौर पर देख रहा है, वहीं सिंगापुर और मलेशिया इसे खुले और मुफ्त रखने के पक्ष में हैं. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या इस मुद्दे पर कोई सहमति बनती है या यह विवाद और गहराता है.
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