भारतीय वायुसेना (IAF) ने स्वदेशी ड्रोन और रडार तकनीक को बढ़ावा देने के लिए मेहर बाबा कॉम्पिटिशन-3 (MBC-3) शुरू कर दिया है. इस कॉम्पिटिशन का मुख्य विषय है Collaborative Drone-Based Surveillance Radars यानी सहयोगी ड्रोन आधारित निगरानी रडार.

इसके तहत कई ड्रोन मिलकर एक स्वार्म (झुंड) बनाएंगे जो हवा में उड़ते हुए रडार की तरह काम करेंगे. वे दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को पहचानेंगे, ट्रैक करेंगे और उनकी सटीक लोकेशन एक केंद्रीय स्टेशन पर रिपोर्ट करेंगे. यह तकनीक युद्ध के मैदान में बहुत उपयोगी साबित होगी, खासकर जब दुश्मन का माहौल खतरनाक हो. रजिस्ट्रेशन 27 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है.

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मेहर बाबा कॉम्पिटिशन-3 का लक्ष्य है कि भारतीय उद्योग, स्टार्ट-अप, यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थान मिलकर एक प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC) तैयार करें. इसमें ड्रोन का झुंड हवाई लक्ष्यों का पता लगाकर उन्हें ट्रैक करेगा और जानकारी एक जगह इकट्ठा करेगा.

यह तकनीक भविष्य के युद्ध में वायुसेना को मजबूत बनाएगी क्योंकि पारंपरिक बड़े AWACS विमानों की जगह छोटे-छोटे ड्रोन काम कर सकेंगे. IAF ने सभी भारतीय कंपनियों, स्टार्ट-अप, शैक्षणिक संस्थानों और रिसर्च संगठनों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है. पूरी जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट https:// Indianairforce.nic.in/mehar_baba पर उपलब्ध ‘विजन डॉक्यूमेंट’ पढ़ सकते हैं.

Mehar Baba Competition

पिछले संस्करणों में मिली बड़ी सफलता

मेहर बाबा कॉम्पिटिशन 2018 में शुरू हुआ था। अब तक इसके दो संस्करण हो चुके हैं…

  • पहला संस्करण का विषय था – Swarm Drones for Humanitarian Assistance and Disaster Relief Operations यानी आपदा राहत और मानवीय मदद के लिए स्वार्म ड्रोन.
  • दूसरा संस्करण का विषय था – Swarm Drone Based Foreign Object Debris Detection यानी एयरक्राफ्ट रनवे पर विदेशी वस्तुओं का पता लगाने वाले स्वार्म ड्रोन.

इन दोनों कॉम्पिटिशनों ने बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला. इससे भारतीय उद्योग और स्टार्ट-अप को बढ़ावा मिला और अनमैन्ड सिस्टम्स (ड्रोन) इंडस्ट्री को लगभग 2000 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिल चुके हैं. यह कॉम्पिटिशन उद्योग, शिक्षा जगत और वायुसेना के बीच का पुल बन गया है.

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मेहर बाबा कॉम्पिटिशन-3 में क्या मिलेगा?

इस कॉम्पिटिशन में अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को विकास के लिए फंडिंग मिलेगी. टॉप तीन विजेताओं को पुरस्कार भी दिए जाएंगे. यह एक अनोखा मॉडल है जो न सिर्फ नई तकनीक विकसित करवाता है बल्कि उसे आगे बढ़ाने के लिए पैसा और ऑर्डर भी देता है. IAF का मानना है कि इससे स्वदेशी एयरोस्पेस इनोवेशन को नई ऊंचाई मिलेगी.

मेहर बाबा कौन थे?

यह कॉम्पिटिशन वायु सेना के महान एयर कमोडोर मेहर सिंह DSO, MVC की याद में चलाया जाता है, जिन्हें प्यार से मेहर बाबा कहा जाता था. वे 1915 में लायलपुर (अब पाकिस्तान) में पैदा हुए. 1934 में उन्होंने रॉयल एयर फोर्स कॉलेज, क्रैनवेल में ट्रेनिंग ली. मात्र 29 साल की उम्र में उन्हें Distinguished Service Order (DSO) मिला, जो बहादुरी और नेतृत्व के लिए दिया जाता है.

1947-48 के युद्ध में उन्होंने भारतीय सेना की पहली टुकड़ी को डकोटा विमान से श्रीनगर पहुंचाया. वे दुनिया के सबसे ऊंचे एयरस्ट्रिप लेह में लैंडिंग करने वाले पहले पायलट भी थे. उन्हें महा वीर चक्र (MVC) भी मिला, जो वायुसेना को पहला MVC था. उनकी बहादुरी और योगदान को याद रखने के लिए IAF ने यह कॉम्पिटिशन शुरू किया.

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क्यों है यह कॉम्पिटिशन महत्वपूर्ण?

आज के युद्ध में ड्रोन बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. मेहर बाबा कॉम्पिटिशन-3 स्वार्म ड्रोन को रडार की तरह इस्तेमाल करने की तकनीक विकसित करेगा. इससे वायुसेना को कम खर्च में ज्यादा प्रभावी निगरानी मिल सकेगी.

यह कॉम्पिटिशन भारत को आत्मनिर्भर बनाने और स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इसमें हिस्सा लेकर युवा स्टार्ट-अप और छात्र भविष्य के युद्ध तैयार करने में अपना योगदान दे सकते हैं. रजिस्ट्रेशन 27 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है. जो भी भारतीय उद्योग, स्टार्ट-अप या संस्थान इसमें रुचि रखते हैं, वे तुरंत आधिकारिक वेबसाइट चेक करें.

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