पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भारी मतदान से गदगद हुए निर्वाचन आयोग ने गर्व से एक घोषणा की है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पश्चिम बंगाल के 44,376 मतदान केंद्रों में से किसी भी केंद्र पर, जहां पहले चरण में मतदान हुआ था, पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई है. इसी तरह, तमिलनाडु के 75,064 मतदान केंद्रों पर, जहां 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव हुए थे, एक भी केंद्र पर पुनर्मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ी.
इससे यह सिद्ध हो गया कि डर, हिंसा और भ्रष्टाचार से मुक्त चुनाव की अपनी पूर्व घोषणा पर आयोग, प्रशासन प्रबंधन, मतदाता और जनता सभी खरे उतरे. चुनाव पूरी तरह भय मुक्त, हिंसा मुक्त, बूथ जाम मुक्त और सोर्स जाम से मुक्त हुए. दोनों राज्यों में लोगों ने आजादी के बाद से अब तक का रिकॉर्ड मतदान किया और देखा.
बंगाल की 294 में से 152 सीटों पर पहले फेज में 92.88% मतदान हुआ. हालांकि छिटपुट मारपीट की घटनाएं हुईं. बंगाल में दो जगह भाजपा उम्मीदवार पर हमला हुआ. एक को तो लोगों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. उनके अंगरक्षक ने किसी तरह भगाकर उनको बचाया. तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 85.15% वोटिंग हुई. दोनों राज्यों में आजादी के बाद से अब तक सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है.
इससे पहले तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मतदान 2011 में 78.29% था, जबकि बंगाल में 2011 में 84.72% मतदान दर्ज किया गया था.
पिछले पखवाड़े में 9 अप्रैल को भी देश के दो राज्यों असम, केरलम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में गुरुवार को विधानसभा चुनाव के लिए बंपर वोटिंग हुई थी. 1950 में असम के बनने के बाद से राज्य में सबसे ज्यादा 85.91% वोटिंग हुई. इससे पहले 2016 में 84.7% मतदान हुआ था. वहीं, पुडुचेरी में आजादी के बाद सबसे ज्यादा 91.23% मतदान हुआ. इससे पहले का रिकॉर्ड 85% (2006, 2011 और 2016 विधानसभा चुनाव) का था.
केरलम में 1987 के बाद यानी पिछले 39 सालों में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई, यहां 78.27% वोट डाले गए. 1987 में रिकॉर्ड 80.54% मतदान हुआ था.
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