अमेरिकी ब्लॉकेड के आगे कब तक टिक पाएगा ईरान? इस्लामाबाद वार्ता से पहले अहम सवाल – America Iran Ceasefire Talks Islamabad Hormuz Strait Iranian Ports Blockade mnrd


अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में आज दूसरे दौर की वार्ता होने जा रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस वार्ता का मूल मकसद होर्मुज स्ट्रेट खुलवाना और ईरान से संवर्धित यूरेनियम हासिल करना है. इस बीच ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि ईरानी पोर्ट्स पर ब्लॉकेड लगने से उसे तगड़ा नुकसान हो रहा है. लेकिन जमीन पर हालात थोड़े अलग नजर आते हैं. सच ये है कि अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड से ईरान पर दबाव जरूर बढ़ा है, मगर वह अभी पूरी तरह घुटने टेकने की हालत में नहीं है.

सबसे पहले समझिए कि यह ब्लॉकेड क्यों अहम है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे बड़े तेल रूट्स में से एक है, जहां से करीब 20% ग्लोबल तेल और गैस गुजरती है. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों को घेरकर उसके तेल कारोबार को रोकने की कोशिश की है. जवाब में ईरान ने भी इस रास्ते पर कंट्रोल कड़ा कर दिया और कई जहाजों को रोकना शुरू कर दिया. अब सवाल ये है कि इससे ईरान को कितना नुकसान हुआ?

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ईरान का ज्यादातर तेल समुद्र के रास्ते ही बिकता है. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि जंग के शुरुआती हफ्तों में तेल के दाम बढ़ने से ईरान की कमाई उल्टा बढ़ गई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के हफ्तों में ईरान रोज कमोबेश दो मिलियन बैरल तेल बेच रहा था और सिर्फ एक महीने में करीब 5 अरब डॉलर तक की कमाई की.

राष्ट्रपति ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ब्लॉकेड से ईरान को रोजाना 500 मिलियन डॉलर का लॉस हो रहा है.

ईरान को कम करना पड़ सकता है प्रोडक्शन

ब्लॉकेड से पहले के मुकाबले ईरान की कमाई में गिरावट नहीं, बल्कि बढ़ोतरी देखी गई. लेकिन आने वाले दिनों में हालात बदल सकते हैं. जैसे-जैसे ब्लॉकेड सख्त होगा, नए जहाजों का निकलना मुश्किल होगा और ईरान के सामने तेल स्टोर करने की समस्या खड़ी होगी. अभी ईरान के पास जमीन और समुद्र में स्टोरेज की कुछ गुंजाइश है. टैंकरों में भी तेल जमा किया जा रहा है. अनुमान है कि कुछ हफ्तों तक यह सिस्टम चल सकता है, लेकिन इसके बाद प्रोडक्शन कम करना पड़ सकता है.

ईरान के पास एक और रास्ता भी है. समुद्र में उसके पहले से तेल मौजूद हैं. अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 160-180 मिलियन बैरल तेल पहले से जहाजों में भरा हुआ है, जो अलग-अलग जगहों पर डिलीवरी का इंतजार कर रहा है. इससे करीब चार महीने तक ईरान की कमाई चल सकती है. मसलन, ईरान की अर्थव्यवस्था का 90 फीसदी इसी तेल व्यापार से आता है.

नेवल ब्लॉकेड के बावजूद ईरान के जहाज होर्मुज पार कर रहे हैं. बताया जाता है कि रात के अंधेरे में ईरानी टैंकर सिग्नल ऑफ करके पोर्ट्स से निकलते हैं और ब्लॉकेड के बावजूद स्ट्रेट पार कर लेते हैं. तेल की सप्लाई गाहेबगाहे जारी है. अब ब्लॉकेड के बावजूद ईरानी जहाज अपने डेस्टिनेशन तक पहुंचने में कामयाब हो रहे हैं और इससे ट्रंप की किरकिरी भी हो रही है. मसलन, ईरान की कमाई का जरिया फिलहाल पूरी तरह ठप नहीं हुआ है.

अमेरिकी नेवल फोर्स ने ईरानी पोर्ट्स से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा रखी है.

ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से वसूल रहा फीस

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलना भी शुरू कर दिया है. कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि एक जहाज से लाखों डॉलर तक लिए जा रहे हैं. यानी जहां एक तरफ अमेरिका दबाव बना रहा है, वहीं ईरान भी इस रास्ते से कमाई निकालने की कोशिश कर रहा है.

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अमेरिकी ब्लॉकेड का क्या स्टेटस है?

अब बात अमेरिका की. क्या वह लंबे समय तक ब्लॉकेड जारी रख सकता है? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह एक बड़ी चुनौती है. उनपर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है. मिड टर्म चुनाव करीब हैं, और सहयोगी देश भी परेशान हैं क्योंकि तेल महंगा हो रहा है. चीन जैसे बड़े देश भी इस ब्लॉकेड से खुश नहीं हैं, क्योंकि उनके व्यापार पर असर पड़ रहा है. यूरोपीय देशों ने होर्मुज स्ट्रेट के मामले में उनका साथ देने से इनकार किया है.

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान ने पहले ही पाबंदी लगा रखी थी और जहाजों से टोल वसूली कर रहा था.

ईरान की ताकत सिर्फ उसकी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उसकी रणनीति भी है. वह सीधे टकराव के बजाय अलग-अलग तरीके अपनाता है. जैसे छोटे-छोटे हमले, साइबर अटैक, और दूसरे देशों पर ईरान से व्यापार न करने का दबाव. इससे वह लंबे समय तक मुकाबला करने की स्थिति में रहता है.

आखिर में सीधी बात ये है कि ईरान तुरंत नहीं टूटेगा. वह कुछ महीने तो आराम से यह दबाव झेल सकता है. लेकिन अगर ब्लॉकेड लंबा चला और रास्ते बंद होते गए, तो असर गहराता जाएगा. दूसरी तरफ, अमेरिका के लिए भी यह लड़ाई आसान नहीं है, जहां राष्ट्रपति ट्रंप किसी भी हाल में अमेरिका के साथ डील करना चाहते हैं.

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