अमेरिका के हिल्टन होटल में आयोजित व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर से ठीक पहले हुई फायरिंग की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ट्रंप इस होटल में अपनी पत्नी और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ डिनर के लिए पहुंचे थे. यहां एक बॉलरूम में डिनर की व्यवस्था की गई थी.
जानकारी के मुताबिक, जिस बॉलरूम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपफर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मौजूद थे, वहां कड़ी सुरक्षा थी, लेकिन होटल के बाकी हिस्सों में खासकर लॉबी और पब्लिक एरिया में उतनी सख्ती नहीं थी. यही सुरक्षा का गैप इस घटना की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आया.
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जिस होटल में यह कार्यक्रम आयोजित होता है, वह आमतौर पर पूरी तरह बंद नहीं किया जाता, बल्कि सामान्य मेहमानों के लिए खुला रहता है. यही वजह मानी जा रही है कि शूटर हथियार लेकर होटल के अंदर तक पहुंच गया.
हर साल हिल्टन होटल में होता है कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर
बताया जाता है कि सालों से यह डिनर वॉशिंगटन हिल्टन होटल में आयोजित होता रहा है और परंपरागत रूप से होटल को पूरी तरह सील नहीं किया जाता. सुरक्षा एजेंसियां मुख्य रूप से बॉलरूम और वीआईपी एरिया पर फोकस करती हैं, जबकि अन्य हिस्सों में एंट्री आमतौर पर आसान रहती है.
घटना के दौरान होटल की लॉबी के आसपास अचानक फायरिंग की आवाजें सुनाई दीं. चश्मदीदों के मुताबिक, कई गोलियां चलने की तेज आवाजें आईं, जिससे अंदर मौजूद लोग घबरा गए. इसके तुरंत बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी यूएस सीक्रेट सर्विस ने तत्काल एक्शन लेते हुए ट्रंप और अन्य शीर्ष नेताओं को सुरक्षित बाहर निकाला.
इस दौरान कई हाई-प्रोफाइल नेताओं को भी तुरंत निकाला गया, जिनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ शामिल थे. सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे होटल को घेर लिया और नेशनल गार्ड के जवानों को अंदर तैनात कर दिया गया.
सीक्रेट सर्विस ने शूटर को पकड़ा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शूटर को मौके पर ही सुरक्षाबलों ने पकड़ लिया है और किसी अन्य के घायल होने की खबर नहीं है. हालांकि, इस घटना ने यह साफ कर दिया कि इतने बड़े और संवेदनशील कार्यक्रम के बावजूद होटल के पब्लिक एरिया में सुरक्षा की कमी बनी हुई थी.
घटना से पहले भी होटल परिसर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. कुछ प्रदर्शनकारी रेड कार्पेट तक पहुंच गए थे और उन्होंने विरोध जताने की कोशिश की. इसके अलावा, होटल के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग जुटे थे, जो युद्ध विरोधी नारे लगा रहे थे.
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