मोटापा सिर्फ दिल, लिवर या शुगर की समस्या नहीं है, यह माता-पिता बनने में भी मसीबत पैदा कर रहा है. जो कपल्स माता-पिता बनने का सपना देख रहे हैं, उनका अधइक वजन इसमें बाधआ बन सकता है. कई इंटरनेशनल हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोटापा महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी को प्रभावित करता है दरअसल, अधिक वजन महिलाओं और पुरुषों दोनों में हार्मोन, ओव्यूलेशन और स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित करता है. अच्छी बात यह है कि छोटे लाइफस्टाइल बदलाव फर्टिलिटी में सुधार सकते हैं.

कैसे बढ़ सकती हैं मुश्किलें

मोटापा अब सिर्फ एक लाइफस्टाइल समस्या नहीं, बल्कि फर्टिलिटी पर असर डालने वाला बड़ा फैक्टर भी बनता जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ज्यादा वजन महिलाओं और पुरुषों, दोनों में गर्भधारण की संभावना कम कर सकता है. यह असर हार्मोन, ओव्यूलेशन और स्पर्म क्वालिटी पर पड़ता है, जिससे कंसीव करने में समय लग सकता है.

महिलाओं पर असर

महिलाओं में ज्यादा शरीर की चर्बी हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ सकती है, जिससे ओव्यूलेशन अनियमित हो जाता है या रुक भी सकता है. रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि मोटापा पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS से जुड़ा हो सकता है, जो बांझपन की प्रमुख वजहों में से एक है. मायो क्लिनिक के मुताबिक, हाई BMI होने पर कंसीव करने में ज्यादा वक्त लग सकता है और IVF जैसे ट्रीटमेंट की सफलता भी प्रभावित हो सकती है.

पुरुषों पर भी असर

प्रजनन क्षमता पर मोटापे का असर सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है. पुरुषों में अतिरिक्त वजन टेस्टोस्टेरोन कम कर सकता है, जिससे स्पर्म काउंट, स्पर्म मूवमेंट और स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ता है. इसका सीधा मतलब है कि कंसीव करने की संभावना घट सकती है, खासकर तब जब वजन के साथ खराब डाइट, कम फिजिकल एक्टिविटी और तनाव भी जुड़ा हो.

क्या मदद कर सकता है

अच्छी खबर यह है कि मामूली वजन घटाने से भी फायदा मिल सकता है. रिपोर्ट में डॉक्टरों ने संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज, बेहतर नींद और तनाव कम करने की सलाह दी है. मायो क्लिनिक भी कहता है कि प्रेग्नेंसी प्लानिंग से पहले हेल्दी वजन पर काम करना और प्रीनेटल केयर लेना जोखिम कम कर सकता है.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ 5-10% वजन कम करने से भी फर्टिलिटी में सुधार देखा जा सकता है. हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज और सही लाइफस्टाइल अपनाकर हार्मोनल बैलेंस सुधारा जा सकता है. WHO भी वेट को बैलेंस रखने से प्रजनन हेल्थ सही रहने की पुष्टि करता है.

क्यों जरूरी है ध्यान रखना

आज के समय में जब भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, तब इसकी प्रजनन क्षमता पर असर को समझना और भी जरूरी हो जाता है. यह सिर्फ प्रेग्नेंसी की संभावना नहीं, बल्कि मां और बच्चे की सेहत से भी जुड़ा मुद्दा है. इसलिए हेल्दी वजन, सही जांच और समय पर मेडिकल सलाह, तीनों ही गर्भधारण की तैयारी में अहम भूमिका निभाते हैं.

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