धनुष ऐसे एक्टर नहीं हैं जो आसानी से मोटिवेशनल स्पीच देते हों. लेकिन अपनी आने वाली फिल्म कारा के प्री-रिलीज इवेंट में उन्होंने कुछ ऐसा कहा, जिसकी एहमियत इसलिए ज्यादा थी क्योंकि उनकी अपनी जिंदगी उस बात को साबित करती है. इवेंट में धनुष ने अपनी बात एक तमिल के फ्रेज से शुरू की. उन्होंने कहा, ‘एनम पोल वजकई’ और बताया कि ये भगवद गीता से लिया गया है, जिसका मतलब है: जैसा आप सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं. इसके जरिए उन्होंने अपनी एक निजी कहानी शेयर की.

धनुष को भगवद गीता से मिली बड़ी सीख

धनुष ने बताया कि साल 2002 में, जब उन्होंने अपने पिता कस्तूरी राजा की निर्देशित फिल्म थुलुवाधो इलामाई से फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वो एक दिन नेशनल अवॉर्ड जीतेंगे.

उन्होंने कहा- उस समय लोग मुझ पर हंस सकते थे,” क्योंकि वो नए थे और ऐसा लग रहा था कि इतनी बड़ी उपलब्धि तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. लेकिन उन्होंने इस विश्वास को अपने अंदर रखा और लगातार मेहनत करते रहे. वो बोले- मैंने पूरी मजबूती से सोचा कि मैं नेशनल अवॉर्ड जीत चुका हूं, और समय आने पर ये सच हो गया.

धनुष को फिल्म आडुकलम में मुर्गा लड़ाने वाले खिलाड़ी की भूमिका के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड – बेस्ट एक्टर मिला, जो उनकी डेब्यू के लगभग 9 साल बाद था. इस फिल्म ने 58वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में 6 पुरस्कार जीते, जिनमें बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्क्रीनप्ले और बेस्ट एक्टर शामिल थे. इसके बाद भी उन्होंने रुकना नहीं सीखा. उन्हें 2019 में फिल्म असुरन के लिए दूसरा नेशनल अवॉर्ड मिला. कुल मिलाकर, उन्हें अभिनय और प्रोडक्शन में चार नेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं.

दुबले-पतले शरीर पर उड़ा मजाक

धनुष पहले भी इस विचार के बारे में बात कर चुके हैं. उन्होंने युवाओं से कहा था कि “मैनिफेस्टेशन” का मतलब है खुद पर विश्वास करना कि आप वहां पहुंच चुके हैं जहां आप जाना चाहते हैं, और फिर उस लक्ष्य के लिए मेहनत करना.

लेकिन इन सब से पहले आई फिल्म पोलधवन. इस फिल्म के बारे में बात करते हुए धनुष के शब्दों में एक अलग ही भावनात्मक जुड़ाव दिखा. उन्होंने कहा- ये मेरे करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक थी. इसकी वजह बॉक्स ऑफिस या रिव्यू नहीं थे, बल्कि कुछ और ही थी.

उन्होंने बताया कि पोलधवन से पहले कई सालों तक उन्हें दुबले-पतले शरीर के कारण लोगों ने बॉडी शेम किया. लेकिन इस फिल्म में एक शर्टलेस सीन के बाद पहली बार दर्शकों की प्रतिक्रिया बदल गई. लोगों ने तालियां बजाईं, सीटी बजाई, डायलॉग या एक्शन के लिए नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के लिए. उन्होंने कहा- ये मेरे लिए बहुत खास फिल्म थी.

धनुष की आने वाली फिल्म कारा 1991 के फ्यूल संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और एक दमदार, किरदार-आधारित कहानी पेश करेगी. इस फिल्म में ममिता बैजू, जयराम, सूरज वेंजरमूडु, केएस रविकुमार और करूणास भी नजर आएंगे. ये फिल्म 30 अप्रैल को दुनियाभर में रिलीज होगी.

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