मेरठ में अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. स्वाट टीम, सर्विलांस टीम और थाना लोहियानगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अवैध पिस्टल बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ करते हुए 11 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया. मौके से भारी मात्रा में अवैध हथियार और निर्माण में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए गए हैं.

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक नगर और पुलिस अधीक्षक अपराध के निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी कोतवाली के पर्यवेक्षण में की गई. 26 अप्रैल को स्वाट टीम प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार गौड़ को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम अल्लीपुर में एक मकान के तहखाने में अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री संचालित हो रही है.

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सूचना मिलते ही टीम ने छापा मारकर मौके से असलम (33) निवासी जाहिदपुर को गिरफ्तार किया. पूछताछ में असलम ने खुलासा किया कि वह अपने साथियों उमर (मुजफ्फरनगर), इरफान (मुरादाबाद), नदीम और रहीमुद्दीन (मेरठ) के साथ मिलकर अवैध पिस्टल बनाता था. फैक्ट्री का संचालन रहीमुद्दीन करता था, जो कच्चा माल उपलब्ध कराता और तैयार हथियारों को अलग-अलग पार्टियों को बेचकर मुनाफा बांटता था.

नेटवर्क का खुलासा और गिरफ्तारी

पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार आरोपियों में लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, टीपीनगर, बागपत और अन्य इलाकों के निवासी शामिल हैं. पुलिस के अनुसार सभी आरोपी शातिर किस्म के अपराधी हैं और कई के खिलाफ पहले से भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं.

बरामदगी में पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 8 तैयार पिस्टल (.32 बोर), 3 अधबनी पिस्टल, 2 स्लाइड, 2 बैरल और 12 मैगजीन बरामद की हैं. इसके अलावा हथियार बनाने के उपकरण जैसे ग्राइंडर, शिकंजे, आरी, हथौड़ी और रेती भी मौके से बरामद की गईं.

पुलिस ने इस मामले में थाना लोहियानगर पर मुकदमा दर्ज कर सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

तहखाने में चल रही थी फैक्ट्री

मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे ने बताया कि सूचना मिली थी कि अलीपुर के एक मकान में डबल बेड के नीचे तहखाना बनाया गया है, जहां अवैध असला फैक्ट्री संचालित हो रही थी. आरोपी डिमांड के अनुसार अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे और पिस्तौल 35 हजार से 60 हजार रुपये तक में बेचते थे.

पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी अलग-अलग पार्टियों को हथियार सप्लाई करते थे और मुनाफा आपस में बांटते थे. पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सप्लायर और खरीददारों की पहचान करने में जुटी है.

आगे की कार्रवाई जारी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार सभी अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है. साथ ही इस अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए कई टीमें काम कर रही हैं. पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से अवैध हथियारों की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा.

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