पहले बात 13 जुलाई 2024 की. पेंसिल्वेनिया के छोटे से शहर बटलर में एक कैंपेन रैली चल रही थी. राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार कर रहे डोनाल्ड ट्रंप स्टेज पर भाषण दे रहे थे. अचानक एक युवक, छत पर चढ़कर, एआर-15 स्टाइल राइफल से फायरिंग शुरू कर देता है. एक गोली ट्रंप के दाहिने कान को छूती हुई निकल जाती है. खून बहने लगता है. रैली में शामिल एक शख्स की मौत हो जाती है, दो लोग घायल. सीक्रेट सर्विस एजेंट्स तुरंत रिएक्ट करते हैं और शूटर थॉमस मैथ्यू क्रूक्स (Thomas Matthew Crooks) को मार देते हैं.
बीती रात वॉशिंगटन डीसी के हिल्टन होटल में व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर चल रहा था. राष्ट्रपति ट्रंप पत्नी मिलानिया और वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस के साथ स्टेज पर थे. डिनर के बॉलरूम के बाहर, सिक्योरिटी चेकपॉइंट के पास, एक आदमी मल्टीपल वेपन्स के साथ दौड़ता चला आता है. शॉटगन, हैंडगन और चाकू. वह फायरिंग शुरू कर देता है. पांच से आठ शॉट्स की आवाज गूंजती है. एक गोली सीक्रेट सर्विस एजेंट को लगती है, लेकिन बुलेटप्रुफ जैकेट उसकी जान बचा लेती है. बाकी सैनिक और एजेंट्स तुरंत एक्शन में आते हैं. शूटर कोल टॉमस एलन (Cole Tomas Allen) को पकड़ लिया जाता है, वह जिंदा है. ट्रंप और बाकी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाता है. कोई गेस्ट या ट्रंप खुद फिजिकली हर्ट नहीं होते. डिनर कैंसल हो जाता है.
दोनों घटनाओं में ट्रंप को टारगेट करने की कोशिश साफ है. बटलर वाली लगभग घातक थी, गोली सिर्फ कुछ इंच दूर थी. डिनर वाली में शूटर अंदर तक नहीं पहुंच पाया, लेकिन फायरिंग के कारण टेंशन वैसा ही हो जाता है. बल्कि पिछली घटना से कुछ ज्यादा ही. क्योंकि, तब ट्रंप एक पूर्व राष्ट्रपति की हैसियस में थे. चुनाव प्रचार कर रहे थे. लेकिन, इस बार वाले न सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर विराजमान हैं. बल्कि, दुनिया के सबसे विवादित दौर में से एक का नेतृत्व कर रहे हैं.
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लेकिन, दोनों बार हुई वारदात में बहुत कुछ कॉमन है. दोनों बार लोन वुल्फ स्टाइल का अटैक दिखा – कोई बड़े संगठन के निशान नहीं मिले. दोनों शूटर्स ने अपने आप प्लान किया लगता है, और मोटिव अभी भी स्पष्ट नहीं है. ये दोनों इवेंट्स अमेरिकी पॉलिटिक्स के डीप पोलराइजेशन को हाइलाइट करते हैं, जहां पॉलिटिकल वायलेंस बढ़ रही है.
दोनों शूटर्स के प्रोफाइल में क्या कॉमन है?
थॉमस मैथ्यू क्रूक्स और कोल टॉमस एलन – दोनों के बहुत समानताएं हैं, लेकिन कुछ अंतर भी. पढ़ने-लिखने में दोनों होशियार. अपनी उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत. कुछ खास पॉलिटिकल झुकाव नहीं, लेकिन ट्रंप विरोधी भावना कूट-कूटकर भरी हुई.
क्रूक्स 20 साल का था, बेटेल पार्क, पेंसिल्वेनिया का रहने वाला. वह हाई स्कूल ग्रेजुएट था, कम्युनिटी कॉलेज ऑफ एलेघेनी काउंटी से इंजीनियरिंग साइंस में एसोसिएट डिग्री की थी. मैथ्स और साइंस के परफॉर्मेंस पर उसे 500 डॉलर का प्राइज़ मिला था. वह नर्सिंग होम में डाइटरी एड का काम करता था. उसके साथियों ने बताया कि चुपचाप और अकेला रहना पसंद करता था. वह स्कूल में बुलिंग का शिकार भी हुआ था. कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं. सोशल मीडिया पर लगभग इनविजिबल. राइफल उसके पिता की थी, लीगली खरीदी गई. क्रूक्स रजिस्टर्ड रिपब्लिकन था, लेकिन 2021 में बाइडेन के इनॉगरेशन डे पर 15 डॉलर एक्टब्लू (डेमोक्रेटिक लीनिंग) को डोनेट किया था.
हिल्टन का हमलावर एलन 31 साल का है. साऊथ कैलिफोर्निया के टॉरेंस शहर का मूल निवासी. हाईली एजुकेटेड. कैलटेक से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर्स (2017), और कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी-डोमिंग्यूज हिल्स से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स (2025). वह पार्ट-टाइम टीचर था सी2 एजुकेशन में. जहां दिसंबर 2024 में उसे टीचर ऑफ द मंथ का अवार्ड मिला था. लिंक्डइन पर मौजूद बायो के अनुसार वह इंजीनियर, साइंटिस्ट, गेम डेवलपर और टीचर था. कैलटेक में क्रिश्चियन फेलोशिप और नर्फ क्लब में भी शामिल था. किसी खास पार्टी के वोटर के रूप में उसने खुद का रजिस्टर नहीं कराया था, लेकिन कमला हैरिस को छोटी सी डोनेशन जरूर दी थी.
कुल मिलाकर दोनों एजुकेटेड थे. क्रूक्स इंजीनियरिंग साइड से, एलन मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस से. दोनों के पास टेक्निकल स्किल्स थीं. दोनों लोनर टाइप दिखते हैं. क्रूक्स को क्लासमेट्स क्वाइट और बुलीड कहते थे, एलन के बारे में भी ज्यादा सोशल डिटेल्स नहीं आए हैं. दोनों ने वेपन्स यूज किए – क्रूक्स ने एआर-15 स्टाइल राइफल, एलन ने शॉटगन, हैंडगन और चाकू. दोनों घटनाओं में शूटर्स ने सिक्योरिटी ब्रेक की कोशिश की – क्रूक्स छत से, एलन चेकपॉइंट भेदकर कर.
पॉलिटिकल झुकाव में भी मिक्स दिखता है. यह दिखाता है कि दोनों पूरे हार्डकोर एक साइड के नहीं थे. मिक्स्ड या अनक्लियर पॉलिटिकल व्यूज. कोई मेनिफेस्टो नहीं मिला अभी तक दोनों के केस में. मोटिव का पता नहीं है, जो दोनों हमलों को रहस्यमयी बनाता है.
कॉमन यह भी कि दोनों युवा या युवा-वयस्क उम्र ग्रुप के, अमेरिकन मिडल-क्लास बैकग्राउंड से, और नॉर्मल लाइफ जीने वाले थे. लेकिन उनके दिमाग में कुछ ऐसा ट्विस्ट आ गया कि दोनों ट्रंप पर अटैक करने चल पड़े. यह मॉडर्न अमेरिका का एक डार्क पैटर्न है. इंटेलिजेंट, क्वाइट लोग जो अचानक वायलेंस की तरफ बढ़ते हैं.
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घटनास्थल के बैकग्राउंड्स और पॉलिटिकल समानता
बटलर, पेंसिल्वेनिया स्विंग स्टेट का हिस्सा है, जहां 2024 इलेक्शन के समय ट्रंप रैली थी. इवेंट आउटडोर था, बड़ी भीड़, ओपन स्पेस. सिक्योरिटी लैप्सेस के बारे में बहुत सवाल उठे थे – छत सिक्योर नहीं थी, शूटर को पहले स्पॉट किया गया था लेकिन एक्शन लेट हुआ. डिनर वॉशिंगटन डीसी में था, एलीट मीडिया और पॉलिटिकल क्राउड के साथ. इंडोर होटल सेटिंग, लेकिन हिल्टन जैसे वेन्यू में पूरा होटल सिक्योर नहीं था. लॉबी और पब्लिक एरिया ओपन रहते हैं. शूटर बाहर से दौड़ता आता है. चेकपॉइंट के पास फायरिंग होती है. दोनों ट्रंप के इर्द-गिर्द होने वाले हाई-प्रोफाइल इवेंट्स.
पॉलिटिकल बैकग्राउंड में दोनों घटनाक्रम पोलराइज्ड अमेरिका को दर्शाते हैं. 2024 के समय बाइडेन वर्सेज ट्रंप एरा था, अब 2026 में ट्रंप प्रेसिडेंट हैं, लेकिन अपनी नीतियों से पूरी दुनिया के विरुद्ध. दोनों बार ट्रंप को टारगेट करना पॉलिटिकल वायलेंस का साइन है. शूटर्स के मिक्स्ड डोनेशंस से लगता है कि यह सिर्फ ‘राइट वर्सेज लेफ्ट’ या ‘डेमोक्रेट वर्सेज रिपब्लिकन’ नहीं, बल्कि डीपर फ्रस्ट्रेशन, मेंटल हेल्थ इश्यूज या पर्सनल व्यूज़ हो सकते हैं. अमेरिका में आसान गन अवेलेबिलिटी और ऑनलाइन इको चैंबर्स भी बैकग्राउंड में काम करते हैं.
दोनों लोन एक्टर लगते हैं. एफबीआई ने क्रूक्स को अकेला ही बताया था, एलन को भी ‘लोन वुल्फ’ ही कहा है ट्रंप ने. कोई फॉरेन लिंक या बड़ी कॉन्स्पिरेसी अभी तक नहीं दिखी.
ट्रंप के रिएक्शन में बड़ा फर्क
यह सबसे इंटरेस्टिंग अंतर है. बटलर वाली घटना पर ट्रंप बहुत आक्रामक थे. उन्होंने सीक्रेट सर्विस पर सवाल उठाए. बाइडेन प्रशासन को ब्लेम किया सिक्योरिटी लैप्सेस के लिए. उन्होंने अपनी इमेज को स्ट्रॉन्ग और फाइटर की तरह प्रोजेक्ट किया – खून से सने कान के साथ मुक्का लहराती उनकी फोटो दुनियाभर में वायरल हुई. सीक्रेट सर्विस एजेंट्स से घिरे ट्रंप कह रहे थे- ‘फाईट, फाइट, फाइट’. चुनाव प्रचार के दौरान हुई इस घटना पर ट्रंप की त्वरित प्रतिक्रिया ने उनके समर्थकों में जोश भरा. वे पॉलिटिकल पॉइंट्स स्कोर रहे थे. उन्होंने यूनिटी की बात की लेकिन अपोजिशन पर अटैक भी किया.
इस बार, 2026 डिनर इंसिडेंट के बाद, ट्रंप का टोन अलग है. उन्होंने सीक्रेट सर्विस की तारीफ की – ‘ग्रेट रिएक्शन टाइम’, ‘ब्रेव मेंबर्स’, ‘फैंटास्टिकली’ काम किया. एक एजेंट को बुलेट प्रुफ जैकेट ने बचाया, ट्रंप ने कहा ‘द वेस्ट डिड द जॉब’. उन्होंने शूटर को ‘वेरी सिक पर्सन’ और ‘लोन वुल्फ’ कहा. उन्होंने कहा कि वह इवेंट पर वापस आना चाहते थे, लेकिन प्रोटोकॉल फॉलो किया. होटल को ‘नॉट पार्टिकुलर्ली सिक्योर’ बोला, लेकिन ओवरऑल पॉजिटिव नोट पर कहा – डिनर रीशेड्यूल होगा, ‘लेट द शो गो ऑन’.
उन्होंने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया. बाइडेन या ओबामा किसी पर नहीं. क्योंकि अब वह खुद प्रेसिडेंट हैं, एडमिनिस्ट्रेशन उनके कंट्रोल में है. पहले वह विक्टिम और चैलेंजर थे, अब पावर में हैं तो सिक्योरिटी की तारीफ कर रहे हैं. हां, उन्होंने इतना जरूर कहा- ‘ऐसे हमले उन पर ही होते हैं, जो अपने फैसलों से कुछ असर डालते हैं. कोई बाइडेन जैसों पर हमला क्यों ही करता.’ उनका नया नजरिया दिखाता है – अब वे ‘इंपॉर्टेंट’ हैं, इसलिए ‘डेंजरस प्रोफेशन’ में हैं. पहले वाली घटना ने उन्हें सिम्पैथी और स्ट्रॉन्ग इमेज दी, इस बार वह मैच्योर और इन-कंट्रोल लीडर बनने की कोशिश कर रहे हैं.
दोनों बार उन्होंने अपने आप को सेंट्रल फिगर बनाया. पहले ब्लड और डिफायंस से, इस बार क्विक इवेक्यूएशन और तारीफों के पुल बांधकर से. लेकिन ओवरऑल, रिएक्शन में शिफ्ट है – आलोचना से तारीफ की तरफ, क्योंकि अब वह व्हाइट हाउस में हैं.
बटलर और डिनर की घटनाओं में बहुत कॉमन चीजें हैं – दो युवा शूटर्स, टेक्निकल/एजुकेटेड बैकग्राउंड, अनक्लियर मिक्स्ड पॉलिटिक्स, लोन वुल्फ अटैक्स, ट्रंप को टारगेट. यह दिखाता है कि अमेरिका में पॉलिटिकल वायलेंस अब नॉर्मल हो रही है, चाहे रैली हो या एलीट डिनर. सिक्योरिटी चैलेंजेस समान हैं. लेकिन ट्रंप का नजरिया बदला है. पहले वह आउटसाइडर थे जो सिस्टम पर अटैक करते थे, अब इनसाइडर हैं जो सिस्टम की तारीफ करते हैं.
सर्वाइवल से लीडरशिप तक. ये दोनों वारदातें समान वार्निंग देती हैं. ट्रंप खुशकिस्मती से दोनों बार बच गए हैं, लेकिन उनके सिक्योरिटी चैलेंज स्पष्ट रूप से उजागर हो गए हैं. ट्रंप इस वक्त अपने फैसलों के जरिये पूरी दुनिया से लड़ रहे हैं. वेनेजुएला से लेकर ईरान तक, ये साफ है कि उनके विरोधियों के पास अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता नहीं है. लेकिन, अमेरिका में रहने वाले किसी सिरफिरे के लिए ये काम उतना मुश्किल नहीं है. 20 महीने के अंतराल में हुई दोनों घटनाओं को बारीकी से देखें तो हमलावरों को ट्रंप में एक ‘रिजीम’ नजर आती है, जिसे वे हर कीमत पर बदल डालना चाहते हैं.
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