मासूम के अपहरण, हत्या के मामले में सजायाफ्ता और करीब ढाई दशक तक फरार रहे सलीम वास्तिक को लेकर अब हर दिन नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं. फिल्मों जैसी इस कहानी में एक ऐसी जानकारी सामने आई है जिसने पुलिस को भी चौंका दिया है. पता चला है हमले के बाद सुर्खियों में आए सलीम की जिंदगी पर फिल्म बनाने की तैयारी चल रही थी और इसके लिए उसे 15 लाख रुपये एडवांस भी दिए जा चुके थे.
एक तरफ जहां सलीम 25 साल तक पुलिस से बचता रहा, वहीं दूसरी तरफ वह सोशल मीडिया पर खुद को एक चर्चित चेहरा बनाकर खुलेआम जिंदगी जी रहा था. इस दौरान उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए, लेकिन अंततः वह कानून के शिकंजे में आ ही गया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सलीम वास्तिक से एक बॉलीवुड फिल्म निर्माता ने संपर्क किया था. मकसद था उसकी जिंदगी को बड़े पर्दे पर उतारना. बताया जा रहा है कि सलीम की कहानी में कई ऐसे पहलू थे, जो फिल्मी दुनिया के लिए आकर्षक माने जाते हैं. खासकर वह घटना, जिसमें उस पर जानलेवा हमला हुआ था, इस कहानी का अहम हिस्सा बन चुकी थी.
यूट्यूब पर मुस्लिमों के खिलाफ बोलता था सलीम
दरअसल, सलीम खुद को मुस्लिम विरोधी बताकर सोशल मीडिया पर वीडियो बनाता था. उसके इन वीडियो को लेकर कुछ लोगों में नाराजगी थी. इसी नाराजगी के चलते लोनी इलाके में उस पर हमला किया गया था. हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ चाकुओं से वार किए. बताया जाता है कि उसे करीब 14 बार चाकू मारे गए, लेकिन वह किसी तरह बच गया. इस घटना के बाद यूपी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों हमलावरों को मुठभेड़ में मार गिराया था. यही घटना सलीम की जिंदगी को एक अलग पहचान दिलाने का कारण बनी. पुलिस के मुताबिक, इसी के बाद एक फिल्म निर्माता की नजर उस पर पड़ी और उसकी कहानी को फिल्म में बदलने की योजना बनी.
शुरुआती बातचीत भी हो चुकी थी और सलीम को 15 लाख रुपये एडवांस के तौर पर दिए गए थे. हालांकि, अब पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि यह कहानी कितनी सच्ची है और कहीं इसे जानबूझकर फिल्मी रूप देने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर तो पेश नहीं किया गया. जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सलीम ने अपनी छवि को जानबूझकर इस तरह गढ़ा, ताकि वह खुद को एक ‘कहानी’ बना सके. या फिर यह सब घटनाएं वास्तविक थीं, जिन्हें बाद में फिल्मी रूप देने की कोशिश की गई. पुलिस अब इस पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल कर रही है.
फजीर्वाड़े का भी दर्ज हो सकता है केस
इधर, सलीम के खिलाफ फर्जीवाड़े का मामला दर्ज करने की भी तैयारी चल रही है. आरोप है कि उसने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए नकली दस्तावेज तैयार किए और अलग-अलग नामों से रहकर पुलिस को लगातार चकमा देता रहा. फरारी के दौरान उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया और ‘सलीम वास्तिक 0007’ नाम से अपनी एक अलग पहचान बना ली. यूट्यूब पर सक्रिय रहते हुए उसने बड़ी संख्या में फॉलोअर्स भी जुटा लिए थे. वीडियो के जरिए वह अपने विचार साझा करता था और धीरे-धीरे एक पहचान बना चुका था. यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद लोग हैरान हैं कि जो व्यक्ति सोशल मीडिया पर सक्रिय था, वह दरअसल एक फरार अपराधी निकला.
पुलिस जांच में सामने आया है कि सलीम का जन्म वर्ष 1972 में उत्तर प्रदेश के शामली जिले के नानूपुरा मोहल्ले में हुआ था. शुरुआती जीवन में उसने मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग ली थी. वह शाओलिन कुंग फू में प्रशिक्षित था और दिल्ली के दरियागंज स्थित एक स्कूल में मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर के रूप में काम भी कर चुका था. इसके साथ ही उसने मुस्तफाबाद इलाके में जैकेट सप्लाई का कारोबार शुरू किया था. इसी दौरान उसकी मुलाकात अनिल नाम के एक व्यक्ति से हुई, जिसने उसे अपराध की दुनिया की ओर धकेल दिया. धीरे-धीरे वह आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो गया और फिर एक मासूम के अपहरण व हत्या के मामले में उसे सजा हुई. जेल से पेरौल पर बाहर आने के बाद से वह फरार हो गया था. इसके बाद करीब 25-26 साल तक वह पुलिस से बचता रहा. इस दौरान उसने कई शहर बदले, कई पहचान बदली और हर बार कानून से बच निकलने में कामयाब रहा.
परिवार रहता है शामली में
परिवार की बात करें तो सलीम का परिवार आज भी शामली के नानूपुरा इलाके में रहता है. उसके बड़े भाई मुजफ्फर हसन ने बताया कि पिछले कई वर्षों से उनका सलीम से कोई संपर्क नहीं था. परिवार ने उससे दूरी बना ली थी और उसकी गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया था. परिवार का कहना है कि सलीम बचपन से ही बड़ा आदमी बनने का सपना देखता था. वह ज्यादा पैसा कमाना चाहता था और इसी चाहत में उसने गलत रास्ता चुन लिया. जब उसकी आपराधिक गतिविधियों की जानकारी परिवार को हुई, तो उन्होंने उससे नाता तोड़ लिया.
पुलिस ने भेजा तिहाड़ जेल
दिल्ली पुलिस ने सलीम गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. उसकी गिरफ्तारी के बाद से ही खूब चर्चा हो रही है. लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि एक व्यक्ति, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय था और खुद को एक अलग पहचान के साथ पेश कर रहा था, वह दरअसल एक सजायाफ्ता अपराधी था.
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