कांग्रेस के सीनियर लीडर और कोषाध्यक्ष अजय माकन ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी के बीच ‘साठगांठ’ का आरोप लगाया. माकन ने कहा कि पंजाब एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, जहां अलगाववादी ताकतें फिर से एक्टिव हो रही हैं और गैंगवॉर के बाद अक्सर ऐसी ही स्थिति पैदा होती है. उन्होंने सवाल उठाया कि जिस बीजेपी को 2022 के पंजाब चुनाव में सिर्फ 6 फीसदी वोट और 2 सीटें मिली थीं, उसके साथ ‘AAP’ के 7 सांसद कैसे जा सकते हैं?

माकन ने तंज कसते हुए कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि ‘AAP’ बीजेपी की बी-टीम है. अब इन्हें अपना नाम बदलकर ‘अरबपति आदमियों की पार्टी’ रख लेना चाहिए.”

उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और आशुतोष जैसे ईमानदार साथियों को राज्यसभा नहीं भेजी, बल्कि उद्योगपतियों को सीटें दीं क्योंकि वहां पैसों का लेनदेन हुआ था.

818 करोड़ की औसत वैल्यू और ‘सेटिंग’ का दावा

अजय माकन ने आंकड़ों के जरिए हमला करते हुए दावा किया कि ‘AAP’ छोड़कर बीजेपी में जाने वाले सात सांसदों की औसत संपत्ति (नेट वर्थ) प्रति सांसद 818 करोड़ 50 लाख रुपये से ज्यादा है. उन्होंने सुशील गुप्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि गुप्ता ने कांग्रेस छोड़ते वक्त ही बता दिया था कि उनकी ‘AAP’ के साथ ‘सेटिंग’ हो गई है और उन्हें राज्यसभा मिलेगी. माकन ने केजरीवाल के पुराने अंदाज में ही उन पर निशाना साधते हुए कहा, “केजरीवाल की भाषा में कहूं तो- सब मिले हुए हैं जी.” उन्होंने आरोप लगाया कि ‘AAP’ ने पंजाब में अलगाववादी तत्वों से भी पैसा लिया है, जो इसे देश विरोधी बनाता है.

राज्यसभा में बीजेपी की बढ़ी ताकत

राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आधिकारिक तौर पर सात ‘AAP’ सांसदों के बीजेपी में विलय को स्वीकार कर लिया है. अब राज्यसभा की वेबसाइट पर राघव चड्ढाअशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता के नाम बीजेपी सदस्यों की लिस्ट में दिख रहे हैं. इस बदलाव के बाद उच्च सदन में ‘AAP’ की संख्या घटकर केवल 3 रह गई है, जबकि बीजेपी की ताकत बढ़कर 113 हो गई है. सांसदों ने शुक्रवार को विलय की याचिका दी थी, जिसे सोमवार को मंजूर कर लिया गया.

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दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इस टूट को सिद्धांतों के साथ गद्दारी करार दिया है. ‘AAP’ सांसद संजय सिंह ने सभापति को याचिका सौंपकर इन सात सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है. हालांकि, बीजेपी में शामिल हुए सांसदों का तर्क है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक गई है, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है.

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