यूपी में ‘ब्राह्मण Vs बैकवर्ड’ कराना चाहते हैं अखिलेश, गाजीपुर मामले पर बोले राजभर – Akhilesh yadav wants Brahmin vs Backward divide minister op Rajbhar Ghazipur Nisha case lclam


यूपी के कैबिनेट मंत्री और सुल्तानपुर के प्रभारी मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के गाजीपुर दौरे की योजना पर तीखा बयान दिया है. राजभर के अनुसार अखिलेश यादव किशोरी की मौत के मामले को गलत रंग देकर समाज में जातीय विद्वेष फैलाना चाहते हैं. मंत्री ने स्पष्ट किया कि गाजीपुर का मामला हत्या या दुष्कर्म का नहीं बल्कि प्रेम प्रसंग से जुड़ा है, जिसमें युवती ने विवाद के बाद गंगा में कूदकर जान दे दी थी. पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया है, फिर भी सपा मुखिया इसे राजनीतिक मोहरा बना रहे हैं. राजभर ने अखिलेश को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज देखने की सलाह दी है.

अखिलेश को सिर्फ गाजीपुर ही क्यों दिखता है?

ओम प्रकाश राजभर ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश के अन्य हिस्सों में यादव समुदाय के लोग अपराध करते हैं, तब अखिलेश यादव वहां क्यों नहीं जाते? उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव केवल वहीं जाना चाहते हैं जहां उन्हें अगड़ा बनाम पिछड़ा का खेल खेलने का मौका मिले.

राजभर के मुताबिक, सपा मुखिया प्रदेश में ब्राह्मण और पिछड़ों को आपस में लड़ाकर अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करना चाहते हैं. उनका आरोप है कि अखिलेश सच को स्वीकार करने के बजाय केवल उन घटनाओं को चुनते हैं जिनसे जातीय ध्रुवीकरण हो सके.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पर जोर

मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि चाहे हाईकोर्ट हो या सुप्रीम कोर्ट, सभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ही साक्ष्य मानते हैं. गाजीपुर मामले में भी वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई हुई है. राजभर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अखिलेश यादव को कानून पर भरोसा करने के बजाय भ्रामक नैरेटिव सेट करने की आदत पड़ गई है. उन्होंने चेतावनी दी कि जनता अब उनकी इस ‘अवसरवादी’ राजनीति को समझ चुकी है और जातीय संघर्ष कराने की उनकी कोशिशें अब सफल नहीं होंगी.

अरुण राजभर को कहा गया 'राजनीतिक गिद्ध'

वहीं, सुभासपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने भी अखिलेश यादव पर हमलावर होते हुए उन्हें ‘राजनैतिक गिद्ध’ करार दिया। अरुण राजभर ने उदाहरण देते हुए कहा कि बाराबंकी में जब यादवों ने एक राजभर का गला काटकर हत्या की, तब अखिलेश वहां नहीं पहुंचे.

इसी तरह देवरिया में राजकुमार चौहान की गोली मारकर हत्या और कौशाम्बी में पाल की हत्या के समय भी सपा मुखिया ने चुप्पी साधे रखी. उन्होंने आरोप लगाया कि जहां यादव बनाम अति-पिछड़ा का मामला होता है, वहां अखिलेश गायब हो जाते हैं और जहां अगड़ा-पिछड़ा दिखता है, वहां वे अवसर तलाशने पहुंच जाते हैं.

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