बीते दिनों हुई हिंसक झड़पों के बाद अब नोएडा में शांति लौटती दिख रही है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है, लेकिन हिंसा की आग भड़काने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. पुलिस ने अब तक इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं और 300 से ज्यादा उपद्रवियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है.

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है, लेकिन हिंसा की आग भड़काने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. डीजीपी राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और एडीजी अमिताभ यश खुद इस पूरे मामले की कमान संभाले हुए हैं और पुलिस मुख्यालय से पल-पल की मॉनिटरिंग की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, कानून तोड़ने वालों और साजिश रचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

बाहरी ताकतों ने रची साजिश?

एसटीएफ (STF) इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और उसके हाथ कुछ ऐसे सुराग लगे हैं, जिनसे पता चलता है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई थी. जांच में सामने आ रहा है कि इस बवाल के पीछे दिल्ली के कुछ संगठनों का हाथ है. सूत्रों का कहना है कि कुछ बाहरी गुटों ने पूरी प्लानिंग के साथ मजदूरों को भड़काया और उन्हें हिंसा के लिए उकसाया.अब पुलिस की डिजिटल सेल व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को खंगाल रही है. जो लोग भड़काऊ पोस्ट डाल रहे थे या अफवाह फैला रहे थे, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि इंटरनेट पर फैलाई गई गलत जानकारियों की वजह से ही स्थिति इतनी बिगड़ गई थी.

वहीं दूसरी ओर, हालात सुधारने के लिए सरकार की हाईपावर कमेटी नोएडा में ही मौजूद है. यह कमेटी श्रमिक संगठनों और फैक्ट्रियों के मालिकों के साथ लगातार बैठकें कर रही है. फिलहाल, नोएडा भेजी गई हाईपावर कमेटी ने श्रमिकों और उद्यमियों के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया है. अच्छी बात यह है कि मजदूरों के हित में कई बड़े फैसले भी लिए गए हैं ताकि उनकी जायज शिकायतों का समाधान हो सके. वरिष्ठ अधिकारी लगातार ग्राउंड जीरो पर रहकर लोगों से संवाद कर रहे हैं. प्रशासन की कोशिश यही है कि बातचीत के जरिए इस विवाद को हमेशा के लिए सुलझा लिया जाए.

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