इजरायल और लेबनान के बीच दशकों बाद पहली बार सीधे राजनयिक स्तर पर बातचीत शुरू हुई है. अमेरिका की मध्यस्थता में मंगलवार को वाशिंगटन डीसी में हुई त्रिपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने शांति समझौते को लेकर अपनी अलग-अलग शर्तें रखीं. वार्ता में इजरायल ने हिजबुल्लाह को पूरी तरह डिसआर्मामेंट (disarmament) करने समेत कई मांग की हैं. जबकि लेबनान ने तुरंत सीजफायर और संघर्ष के कारण पैदा हुए गंभीर मानवीय संकट को दूर करने के ठोस कदम उठाने पर जोर दिया है.
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, अमेरिका विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अध्यक्षता में मंगलवार को इजराइल और लेबनान के प्रतिनिधियों ने वाशिंगटन डीसी में शांति समझौते की संभावनाओं पर चर्चा करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की है.
ये बैठक दो घंटे से ज्यादा चली. इसमें इजरायल की ओर से अमेरिका में उनके राजदूत येचियल लाइटर और लेबनान की ओर से राजदूत नादा हमादेह (Nada Hamadeh Moawad) ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ भाग लिया.
बयान में कहा गया कि तीनों पक्षों ने इजरायल और लेबनान के बीच सीधे वार्ता शुरू करने की दिशा में रचनात्मक चर्चा की. अमेरिका ने स्पष्ट किया कि कोई भी सीजफायर समझौता दोनों सरकारों के बीच अमेरिकी मध्यस्थता में ही हो सकता है.बैठक से लेबनान के पुनर्निर्माण, आर्थिक सुधार और क्षेत्रीय निवेश के अवसर बढ़ने की संभावना जताई गई है.
हिज्बुल्लाह का डिसआर्मामेंट जरूरी
बयान में कहा गया है कि वाशिंगटन में हुई चर्चा के दौरान इजरायली पक्ष ने स्पष्ट किया कि स्थायी शांति के लिए लेबनान के अंदर सक्रिय सभी गैर-राज्य सशस्त्र बलों को भंग करना जरूरी है. इजरायल का कहना है कि आतंकी बुनियादी ढांचे को हटाए बिना क्षेत्रीय स्थिरता संभव नहीं है. इजरायली प्रतिनिधियों ने सीधी बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने और सुरक्षा चिंताओं को दूर करने की बात दोहराई है.
तुरंत हो सीजफायर
उधर, लेबनान ने वार्ता के दौरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. लेबनानी प्रतिनिधिमंडल ने नवंबर 2024 के सीजफायर समझौते को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता बताई. उन्होंने ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण पैदा हुए गंभीर मानवीय संकट को दूर करने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने और लेबनान के पुनर्निर्माण में सहायता की मांग की है.
इसके अलावा लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वाशिंगटन में चल रही वार्ता लेबनानी लोगों, विशेष रूप से दक्षिण में रहने वाले लोगों की पीड़ा के अंत की शुरुआत का प्रतीक होगी, क्योंकि 2 मार्च से जारी इजरायली हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,124 हो गई है और 6,921 लोग घायल हुए हैं, जब हिज्बुल्लाह ने ईरान के समर्थन में इजरायल की ओर रॉकेट दागना शुरू किया था.
लेबनानी सरकार अपने पूरे क्षेत्र पर राज्य का अधिकार बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जिसमें हिज़्बुल्लाह जैसे गैर-सरकारी संगठनों के पास मौजूद हथियारों के मुद्दे को हल करने के प्रयास भी शामिल हैं. हालांकि, इजरायल के लगातार हमलों और आंतरिक राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण प्रगति धीमी और जटिल बनी हुई है.
आपको बता दें कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए हमले के बाद हिज़्बुल्लाह ने 2 मार्च को ईरान के समर्थन में अमेरिका-इजरायल युद्ध में कूद गया था और 2024 के सीजफायर के बाद पहली बार दक्षिणी लेबनान से इजरायल की ओर रॉकेट दागे. इजरायल ने देश भर में कई क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए एक तीव्र सैन्य अभियान के तहत जमीनी हमले किए, जिसमें 2,000 से अधिक लोग मारे गए. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को अपने दैनिक अपडेट में बताया कि पिछले 24 घंटों में इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए हमलों में कम से कम 35 लोग मारे गए हैं.
—- समाप्त —-

