खाड़ी के समंदर में अमेरिका ने ईरान की ऐसी घेराबंदी की है जिसे तोड़ना नामुमकिन साबित हो रहा है. ईरान के 8 तेल टैंकरों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लहरों को तो पार कर लिया, लेकिन वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खींची हुई ‘लक्ष्मण रेखा’ नहीं लांघ पाए. अमेरिकी नौसेना ने इन सभी 8 जहाजों को बीच समंदर में ही घेर कर रोक लिया है. अमेरिका का मकसद एकदम साफ है कि ईरान के तेल की सप्लाई को पूरी तरह ठप कर देना ताकि वह समझौते के लिए मजबूर हो जाए.
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी को और सख्ती से लागू किया है. WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, नाकाबंदी शुरू होने के बाद से अब तक ईरान से जुड़े 8 तेल टैंकरों को अमेरिकी नौसेना ने बीच समुद्र में रोक दिया है. ये जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें इंटरसेप्ट कर वापस लौटने के लिए कहा गया. वहीं न्यूज एजेंसी एपी के हवाले से एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यह पूरी रणनीति जहाजों की लगातार निगरानी पर आधारित है. जैसे ही कोई जहाज ईरान के बंदरगाह से निकलता है, अमेरिकी बल उसकी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर देते हैं. इसके बाद ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ते ही इन जहाजों को बीच रास्ते में रोककर वापस भेज दिया जाता है.
महज 36 घंटे में ईरान का 90% व्यापार ठप
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने इस पूरी कार्रवाई को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने साफ कहा है कि मिडिल ईस्ट के समंदर पर अब सिर्फ और सिर्फ अमेरिका का राज है और उनकी ‘मैरीटाइम सुपीरियरिटी’ यानी समुद्री बादशाहत बरकरार है. कूपर के अनुसार, नाकाबंदी लागू होने के 36 घंटे के भीतर ही ईरान के समुद्र के जरिए होने वाले व्यापार को पूरी तरह रोक दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की करीब 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर है, ऐसे में इस कार्रवाई का सीधा असर उसकी आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा है.
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख दोहराया है. उन्होंने कहा है कि ईरान के पास परमाणु बम होना स्वीकार नहीं किया जा सकता. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल युद्धविराम बढ़ाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं. फिलहाल, होर्मुज और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी गतिविधियां बढ़ी हुई हैं. जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और हर गतिविधि पर नजर बनाए रखी जा रही है. यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव बना हुआ है और कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
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