बिहार में नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नई सरकार का गठन होने जा रहा है. सरकार का फॉर्मूला अब पूरी तरह बदल चुका है. नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री होंगे तो जेडीयू कोटे से दो नेताओं को डिप्टी सीएम बनाए जा रहे हैं.
सत्ता परिवर्तन के साथ सरकार का मॉडल भी बदल गया है. नीतीश कुमार सीएम थे तो बीजेपी कोटे से दो डिप्टी सीएम थे, लेकिन अब जब बीजेपी से सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनेंगे तो जेडीयू से विजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगे.
बिहार की राजनीति में जेडीयू नेता विजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी एक बेहद अनुभवी, शांत और नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगी माने जाते हैं. यही वजह है कि नीतीश कुमार अब जब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर दिल्ली में राजनीति करने का फैसला किया है तो जेडीयू से विजय चौधरी और विजेंद्र यादव को डिप्टी सीएम की कुर्सी सौंप रहे. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जेडीयू के ये दोनों नेता कौन हैं, जिन्हें नीतीश कुमार ने अपना सियासी उत्तराधिकारी बनाने का फैसला किया है?
कौन हैं विजेंद्र प्रसाद यादव?
जेडीयू कोटे से डिप्टी सीएम बनाए जा रहे विजेंद्र यादव ने 1990 में अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया और कोसी इलाके के बड़े चेहरा बनकर उभरे. जनता दल से पहली बार सुपौल क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे, तब से लेकर आज तक उन्होंने लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है. इतनी लंबी राजनीतिक पारी ने उन्हें बिहार की राजनीति में एक अनुभवी और भरोसेमंद चेहरा बना दिया है.
1990 का दौर बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का समय था. कांग्रेस शासन के बाद जनता दल का सियासी उदय हुआ और इसी लहर में विजेंद्र यादव ने अपनी पहचान बनाई. जनता दल के टिकट पर चुनाव जीतकर वे विधानसभा पहुंचे और धीरे-धीरे अपनी कार्यशैली से नेतृत्व का भरोसा जीत लिया. 1991 से लेकर अभी तक जितनी भी सरकारें बनी, सभी में मंत्री रहे.
लालू-नीतीश कुमार के करीब विजेंद्र
विजेंद्र यादव को एक समय लालू प्रसाद यादव का राइटहैंड माना जाता था. लालू प्रसाद ने विजेंद्र की ईमानदार छवि व मेहनत को देखते हुए 1991 में उन्हें राज्य मंत्री बनाया. इसके बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया गया. लालू ने 1995 के चुनाव में फिर जीत हासिल करने के बाद उन्हें नगर विकास मंत्री बनाया. इन विभागों में उनके काम को सराहा गया और उन्होंने प्रशासनिक अनुभव को और मजबूत किया.
1997 में जनता दल में विभाजन हुआ, जब लालू प्रसाद और शरद यादव के बीच अलग-अलग गुट बन गए. विजेंद्र प्रसाद यादव ने शरद यादव का साथ चुना और इस फैसले के कारण उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर होना पड़ा. इसके बाद नीतीश और शरद यादव एक साथ आए तो उन्होंने जेडीयू में शामिल हो गए. 2000 के चुनाव में जेडीयू के टिकट पर विधायक बने.
विजेंद्र यादव 2005 के चुनाव में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने और जेडीयू को सत्ता में लाने का रोल अदा किया. 2005 के बाद बनी सरकार में उन्हें फिर कैबिनेट मंत्री बनाया गया और फिर 2010 में मंत्री बने. इस दौरान सिंचाई, ऊर्जा, विधि, संसदीय कार्य, मद्य निषेध और निबंधन जैसे विभागों का प्रभार संभाला. इसके बाद वित्त मंत्री बने, 2015 में राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान उन्हें मंत्री पद से हटाया गया, लेकिन जल्द ही वे फिर सत्ता में लौट आए. इसके बाद 2017 में एनडीए की सरकार में भी मंत्री रहे, इस तरह नीतीश की हर सरकार में मंत्री रहे.
भरोसेमंद चेहरो को डिप्टीसीएम
बिहार में 2005 से लेकर अभी तक जितनी भी सरकारें बनी, उन सभी सरकारों में मंत्री रहे. 2024 में जदयू के दोबारा एनडीए में आने के बाद बनी सरकार में भी विजेंद्र यादव प्रमुख मंत्रियों में शामिल रहे. इसके बाद 2025 में सरकार बनी तो मंत्री रहे. अब एक बार फिर बिहार में सत्ता परिवर्तन के बीच उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है. यह उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन के प्रति निष्ठा का ही परिणाम है कि वे लगातार सत्ता के केंद्र में बने हुए हैं.
विजय चौधरी दूसरे डिप्टीसीएम
जेडीयू कोटे से दूसरे उपमुख्यमंत्री बनने वाले विजय कुमार चौधरी है, जिन्हें नीतीश कुमार के करीबी रणनीतिकार माना जाता है.
उनका जन्म बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था, शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की, लेकिन पारिवारिक राजनीतिक विरासत के चलते नौकरी छोड़कर राजनीति में आ गए. अस्सी के दशक में राजनीतिक पारी का आगाज उन्होंने कांग्रेस से किया. कांग्रेस से विधायक बने और सीएलपी लीडर तक रहे.
बिहार में बदलते सियासी माहौल में विजय कुमार चौधरी ने भी अपना मिजाज बदला और जेडीयू का दामन थाम लिया. 2005 से लेकर अभी तक हर चुनाव में विधायक बनते आ रहे हैं, जेडीयू के भूमिहार चेहरा माने जाते हैं. विजय चौधरी को नीतीश कुमार का ‘दायां हाथ’ माना जाता है. वे जेडीयू (JDU) के उन नेताओं में से हैं जो हर कठिन परिस्थिति में नीतीश कुमार के साथ खड़े रहे हैं.
बिहार सरकार में वे संसदीय कार्य, जल संसाधन, सूचना एवं जनसंपर्क, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे अहम विभागों के मंत्री रहे हैं. 2015 से 2020 तक बिहार विधानसभा के अध्यक्ष रहे, लेकिन उसके बाद फिर से मंत्रिमंडल में लौटे. अप्रैल 2026 की बिहार की बदलती सियासत में विजय चौधरी जेडीयू की तरफ से दिल्ली-पटना के बीच अहम भूमिका निभाते दिखे, जहां उन्होंने नीतीश सरकार के इस्तीफे और नई सरकार के गठन की प्रक्रियाओं पर बड़े बयान दिए. अब उन्हें डिप्टीसीएम बनाया जा रहा है,.
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