अमावस्या अप्रैल 2026: वैशाख अमावस्या हिंदू पंचांग के अनुसार एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है, जो पितरों की शांति और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष होती है. वर्ष 2026 में यह अमावस्या 16 अप्रैल की रात से शुरू होकर 17 अप्रैल 2026 की शाम तक प्रभावी रहेगी. इसी कारण आज यानी 17 अप्रैल को स्नान, दान और तर्पण किया जा रहा है. अमावस्या तिथि का निर्धारण केवल कैलेंडर से नहीं, बल्कि उदय तिथि के आधार पर होता है, इसलिए अधिकतर धार्मिक कार्य 17 अप्रैल को ही संपन्न किए जाएंगे. इस दिन किए गए धार्मिक कार्य विशेष फल देने वाले माने जाते हैं. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं.
अमावस्या मुहूर्त 2026 (Amavasya Timing 2026)
ब्रह्म मुहूर्त – 04:25 AM से 05:09 AM
प्रातः सायंकाल – प्रातः 04:47 से प्रातः 05:54 तक
अभिजित मुहूर्त – 11:55 AM से 12:47 PM
विजय मुहूर्त – 02:30 PM से 03:22 PM
गोधूलि मुहूर्त – 06:47 PM से 07:09 PM
सायं सायं – 06:48 PM से 07:54 PM तक
अमृत काल – 09:50 AM से 11:18 AM
सर्वार्थ सिद्धि योग – पूरे दिन
धार्मिक महत्व: क्यों खास है वैशाख अमावस्या?
वैशाख माह को स्वयं धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है, इसकी अमावस्या को पितृ कर्म के लिए विशेष दिन कहा गया है. मान्यता है कि इस दिन किए गए तर्पण और दान सीधे पितरों तक पहुंचते हैं. इस दिन लोग गंगा स्नान या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं, उसके बाद पिंडदान, तर्पण और हवन जैसे कर्म किए जाते हैं. ऐसा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.
पूजा विधि और परंपराएं
आज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना सबसे पहला नियम माना जाता है. इसके बाद साफ वस्त्र पहनकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. फिर पितरों के नाम से तर्पण किया जाता है, जिसमें जल, तिल और कुश का प्रयोग किया जाता है. इसके बाद जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है. कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं. दिनभर साधना एवं मंत्र जाप करते हैं.
क्या न करें आज के दिन
इस दिन नए कार्यों की शुरुआत, मांगलिक कार्यक्रम या बड़े निवेश से बचने की सलाह दी जाती है. साथ ही, क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए.
पंचक का साया
इस बार वैशाख अमावस्या के साथ पंचक काल का प्रभाव भी बताया गया है, जो ज्योतिष में विशेष सावधानी वाला समय माना जाता है. इस दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि पंचक में किए गए कुछ कामों का प्रभाव अशुभ माना जाता है.
पंचक के दौरान विशेष रूप से यह कार्य नहीं करने चाहिए.जैसेलकड़ी या ईंधन से जुड़े बड़े काम शुरू न करें. घर की छत, निर्माण या मरम्मत का नया कार्य न करें. पलंग, फर्नीचर या भारी सामान की खरीद-फरोख्त टालें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यों में भी विशेष सावधानी रखी जाती है.
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