उलझ गया मोदी सरकार का नंबरगेम! महिला आरक्षण के दांव पर भारी पड़ रही परिसीमन की रार – Delimitation Bill loksabha voting nda strength India block women reservation act ntcppl


भारत में महिला आरक्षण कानून लागू हो गया है. संसद में आधी रात तक चले बहस के बीच कानून मंत्रालय ने इस बिल को देश में लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है. लेकिन इस कानून को व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए इससे जुड़े तीन बिलों पर लोकसभा में बहस जारी है.

ये बिल हैं-

1-संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026
2-परिसीमन बिल 2026
3-केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026

बिल पास कराने के लिए कितने सांसदों का समर्थन जरूरी

इनमें से पहला यानी कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 संविधान संशोधन विधेयक है. इसलिए इसे पास कराने के लिए विशेष बहुमत चाहिए. संविधान संशोधन बिलों को दोनों सदनों से विशेष बहुमत से पास करवाना होता है.

इसका मतलब है कि सदन में मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों में से दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन ज़रूरी है, और यह संख्या सदन की कुल सदस्य संख्या के आधे से कम नहीं होनी चाहिए.  अभी लोकसभा में 540 सांसद हैं. तीन सीटें खाली हैं.

इसलिए यहां विशेष बहुमत का अर्थ 360 सांसदों का समर्थन होगा. लेकिन NDA की अपनी ताकत 293 है, जो जरूरी संख्या से 67 कम है.

बता दें कि इन बिलों पर शुक्रवार शाम 4 बजे वोटिंग होनी है.

अगर कुछ पार्टियां लोकसभा में वोटिंग से दूर रहती हैं अथवा सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करती हैं तो इस बिल को पास कराने के लिए जरूरी संख्या कम हो सकती है, लेकिन इस कमी को पूरा करने के लिए ऐसे सदस्यों की संख्या बहुत ज़्यादा होनी चाहिए. यानी कि विपक्ष की कई पार्टियों को बहिष्कार करना होगा.

अभी विपक्ष की ताकत 234 है. आखिर में सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि शुक्रवार को सदन में कितने सदस्य आते हैं, कितने वोटिंग से दूर रहते हैं, और कितने असल में अपना वोट डालते हैं.

गौरतलब है कि ये तीनों बिल जुड़े हुए हैं अगर इनमें से एक बिल भी गिरता है तो तीनों बिल गिर जाएंगे. इस बिल का विरोध करने वाले विपक्ष के बड़े दलों में डीएमके, टीएमसी, सपा, आरजेडी है. यही नहीं इस बार मोदी सरकार को झटका देते हुए ओडिशा की बीजेडी भी बिल के खिलाफ नजर आ रही है. बीजेडी विपक्ष की मीटिंग में भी शामिल थी.

बिल को इंड्रोड्यूस कराने में भी सरकार को विरोध का सामना करना पड़ा

गुरुवार को बिल पेश किए जाने के समय हुई वोटिंग से यह पता चला कि NDA के पास संविधान संशोधन बिलों को पास कराने के लिए ज़रूरी संख्या नहीं थी. इस दौरान 436 सांसदों की मौजूदगी में, 252 सांसदों ने बिल पेश किए जाने के पक्ष में वोट दिया, जबकि 185 ने इसका विरोध किया.

केंद्र सरकार के पास क्या क्या विकल्प हैं

अगर सरकार को लगता है कि वह लोकसभा में इस बिल पर  हारने की कगार पर है, तो उसके सामने 2 विकल्प नजर आते हैं.

1. मोदी सरकार लोकसभा में बिल पर वोटिंग करा सकती है, अगर बिल गिर जाता है, तो सरकार इसका ठीकरा विपक्ष पर फोड़ सकती है.

2. विपक्ष के साथ आम सहमति बना सकती है और विधेयकों को जांच-पड़ताल के लिए किसी संसदीय स्थायी समिति के पास भेज सकती है. सरकार इससे पहले वन नेशन, वन इलेक्शन बिल को भी संसदीय समिति के पास भेज सकती है. वक्फ बिल को भी सरकार ने जेपीसी के पास भेजा है.

सरकार मतदान से पहले परिसीमन से जुड़े इन तीनों विधेयकों को वापस भी ले सकती है.

खडगे अड़े, मोदी ने की अपील

इस बीच कांग्रेस संसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ कह दिया है कि विपक्ष के पास संख्या बल है और विपक्ष बिल को पास नहीं होने देगी. यानी कि कांग्रेस बिल के खिलाफ लोकसभा में वोट करेगी.

मोदी 3.O के सामने पहला संविधान संशोधन बिल पास कराने की चुनौती

अगर परिसीमन से जुड़े तीनों बिल लोकसभा में पास नहीं होते या वोटिंग में ये बिल गिर जाते हैं तो यह मोदी 3.0 सरकार का पहला प्रमुख बिल होगा जो लोकसभा में गिर जाएगा.

मोदी 3.0 के शुरू से अब तक सरकार ने कई बिल पास कराए हैं. जून 2024 से शुरू हुए इस कार्यकाल में सरकार ने आर्थिक सुधार, आपराधिक कानूनों को आधुनिक बनाने और व्यवसाय आसान बनाने पर फोकस किया.  जुलाई 2024 में तीन नये आपराधिक कानून लागू हुए . इसके अलावा वक्फ बिल को भी सरकार ने व्यवधानों के बावजूद पेश करवा लिया. लेकिन अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिसीमन से जुड़े ये तीन बिल हैं यो संविधान संशोधन बिल हैं.

कुल मिलाकर मोदी 3.0 ने साधारण बहुमत वाले बिलों को अपेक्षाकृत आसानी से पास कराया. अब परिसीमन संबंधी तीन बिल पहला बड़ा टेस्ट हैं क्योंकि इनमें से एक संवैधानिक संशोधन है और विपक्ष इसे फेडरल ढांचे पर हमला बता रहा है. अगर ये बिल पास हो गए तो 2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ हो जाएगा, लेकिन असफलता सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बनेगी.

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