नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद श्रम विभाग ने बड़ा सख्त रुख अपनाते हुए श्रम कानूनों के उल्लंघन पर व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है. विभाग ने मजदूरों के अधिकारों से जुड़े मामलों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और एजेंसियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. इस कार्रवाई के बाद औद्योगिक क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है और कई एजेंसियां जांच के दायरे में आ गई हैं.

अपर श्रमायुक्त राकेश द्विवेदी ने बताया कि नोएडा की 24 फैक्ट्रियों से जुड़े 203 ठेकेदारों (संविदाकारों) के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. इन पर मजदूरों को उनके अधिकारों से वंचित रखने और श्रम कानूनों का पालन न करने के गंभीर आरोप लगे हैं. विभाग ने इन ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और संबंधित एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी चल रही है.

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श्रम विभाग ने इन संविदाकारों पर करीब 1 करोड़ 16 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है. यह राशि मजदूरों के बकाया के रूप में लौटाने का आदेश दिया गया है और संबंधित ठेकेदारों को नोटिस भी जारी किए गए हैं. अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई मजदूरों के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है.

ठेकेदारों की भूमिका और जांच का दायरा बढ़ा

अधिकारियों के अनुसार, जिन ठेकेदारों के श्रमिक हाल की हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं में शामिल पाए गए हैं, उनकी भूमिका को भी संदिग्ध माना जा रहा है. इस पहलू की अलग से जांच की जा रही है और संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा गया है. विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी.

श्रम विभाग ने कहा है कि यह अभियान केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर निगरानी भी की जाएगी. विभाग का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है.

इस कार्रवाई के बाद कई ठेकेदारों और एजेंसियों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है और कई कंपनियां अपने रिकॉर्ड और भुगतान प्रणाली की समीक्षा में जुट गई हैं.

मजदूरों के वेतन और सुविधाओं पर सख्त निर्देश

श्रम विभाग ने गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में काम करने वाले श्रमिकों की सैलरी में 21 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान किया है. यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएंगी और इसका भुगतान मई महीने की 7 से 10 तारीख के बीच किया जाएगा. यह बढ़ोतरी संविदा और स्थायी दोनों तरह के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी.

विभाग ने वेतन और सुविधाओं को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. मजदूरों के वेतन से केवल EPF और ESI की ही कटौती की जा सकती है, इसके अलावा किसी भी तरह की कटौती को अवैध माना जाएगा.

साथ ही ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से देना अनिवार्य होगा और बोनस के साथ ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं भी देना जरूरी होगा. यदि कोई ठेकेदार समय पर वेतन नहीं देता या कम भुगतान करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर अदालत में मामला भी दर्ज किया जाएगा.

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