आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की वजह से दुनिया भर में हजारों जॉब्स जा रही हैं और ये किसी से छिपा नहीं है. लेकिन एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जो AI पर सवाल खड़े कर रहा है. अब तक कंपनियां AI को हैकिंग से बचने के लिए यूज कर रही थीं, लेकिन एंथ्रोपिक का एक टूल हैकिंग के लिए इस्तेमाल हो रहा है.

एक एक्सपेरिमेंट में AI मॉडल Claude Opus ने खुद गूगल क्रोम ब्राउज़र की कमजोरी ढूंढी और उसका इस्तेमाल करके एक पूरा हैकिंग तरीका यानी एक्सप्लॉइट तैयार कर दिया.

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हैकट्रॉन पोर्टल पर अनालिस्ट ने पूरी डिेटेल्स शेयर की है. उन्होंने ये भी बताया है कि ये सिक्योरिटी टेस्टिंग के लिए किया गया था. इस पूरी डिटेलिंग में उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया है कि ये हैकिंग परफॉर्म करने के लिए उन्होंने लगभग 2,283 डॉलर्स यूज किए हैं. इसमें टोटल 2.23 बिलियन टोकेन्स खर्च हुए हैं जो API कॉस्ट में आते हैं.

Claude Opus ने किया क्रोम हैकिंग का पूरा प्लान तैयार

यह काम एक साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर ने टेस्ट के तौर पर किया था. उसने AI को एक टास्क दिया कि Chrome के V8 इंजन में कोई बग या कमजोरी खोजो और फिर उसका इस्तेमाल करके सिस्टम को कंट्रोल करने का तरीका बनाओ.

यह काम आसान नहीं था, क्योंकि इसमें बहुत डीप टेक्निकल समझ और कई स्टेप्स होते हैं. आमतौर पर ऐसे एक्सप्लॉइट बनाने में एक्सपर्ट हैकर्स को हफ्तों या महीनों का समय लग जाता है.

शुरुआत में AI ने की गलती, लेकिन…

लेकिन यहां AI ने धीरे-धीरे सीखते हुए यह काम पूरा किया. शुरुआत में AI कई बार गलत दिशा में गया, कोड काम नहीं कर रहा था और बार-बार फेल हो रहा था. हर बार इंसान को उसे थोड़ा गाइड करना पड़ा. फिर AI ने अपने पुराने जवाबों से सीखते हुए कोड को सुधारा और आखिर में एक काम करने वाला एक्सप्लॉइट तैयार कर लिया.

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इस पूरे प्रोसेस में बहुत ज्यादा डेटा और कंप्यूटिंग पावर का इस्तेमाल हुआ. अरबों टोकन का इस्तेमाल हुआ और इस पर लाखों रुपये खर्च हुए. यानी यह कोई सस्ता या आसान काम नहीं था. लेकिन यह दिखाता है कि अगर सही रिसोर्स मिलें, तो AI कितना एडवांस काम कर सकता है.

क्या होता है एक्सप्लॉइट?

यह समझना जरूरी है कि एक्सप्लॉइट क्या होता है. आसान भाषा में कहें तो यह एक ऐसा तरीका होता है जिससे किसी सॉफ्टवेयर की कमजोरी का फायदा उठाकर सिस्टम में घुसा जा सकता है या उसे कंट्रोल किया जा सकता है. इस केस में AI ने Chrome के उस हिस्से को निशाना बनाया जहां गलती की संभावना थी.

एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि यह अटैक Chrome के लेटेस्ट वर्जन पर नहीं, बल्कि पुराने वर्जन पर काम करता था. कई ऐप्स जैसे Discord अपने अंदर Chrome का पुराना इंजन इस्तेमाल करते हैं.

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यही सबसे बड़ी कमजोरी बनती है, क्योंकि ये वर्जन समय पर अपडेट नहीं होते. AI ने इसी गैप को पहचाना और उसी पर पूरा हमला तैयार किया.

इस इंसिडेंट ने टेक दुनिया में एक बड़ी बहस छेड़ दी है. क्या AI अब साइबर सिक्योरिटी के लिए खतरा बन सकता है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI दोधारी तलवार की तरह है.

एक तरफ यह सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स को कमजोरियां जल्दी ढूंढने में मदद कर सकता है, दूसरी तरफ गलत हाथों में जाकर यह बड़े साइबर हमलों की वजह भी बन सकता है.

AI और हैकिंग

एक और चिंता यह है कि अगर फ्यूचर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सस्ता और आसान हो गया, तो ज्यादा लोग इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं. अभी यह एक्सपेरिमेंट महंगा और मुश्किल था, लेकिन टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है. आने वाले समय में यह काम और आसान हो सकता है.

इसी वजह से कुछ बड़ी AI कंपनियां अपने सबसे एडवांस्ड मॉडल्स को पूरी तरह पब्लिक नहीं कर रही हैं. उन्हें डर है कि इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है. रेगुलेशन और सेफ्टी पर भी अब ज्यादा चर्चा हो रही है.

इस तरह के डेवेलपमेंट से ऐसा लह रहा है कि अब AI डिस्ट्रक्टिव होता दा रहा है. अगर सही समय पर इसे तरीके से कंट्रोल नहीं किया गया, तो आने वाले समय में साइबर सिक्योरिटी से जुड़े खतरे और बढ़ सकते हैं.

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