एशिया का सबसे अमीर आदमी बनते ही गौतम अडानी ने किए इस पवित्र धाम के दर्शन – gautam adani visited mehsana taranga jain temple asia richest man tvisu


मशहूर उद्योगपति गौतम अडानी ने अक्षय तृतीया पर गुजरात के मेहसाणा स्थित तारंगा जैन तीर्थ के दर्शन किए. वह अपने परिवार संग इस पवित्र तीर्थ स्थल पर पूजा के लिए आए थे. उनकी इस यात्रा को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए. बता दें कि अडानी ग्रुप के चेयरमैन ने यह तीर्थ यात्रा एशिया में सबसे अमीर व्यक्ति की उपलब्धि हासिल करने के बाद की है. कुछ दिन पहले ही मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए अडानी एशिया के सबसे अमीर शख्स बने हैं.

तारंगा जैन तीर्थ के दर्शन के लिए गौतम अडानी परिवार संग खेरालू तालुका के डभोड़ा गांव के हेलीपैड पर उतरे. डभोड़ा में जैन समाज के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया. इसके बाद गौतम अडानी ने अपने परिवार के साथ मंदिर के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की.

मंदिर के दर्शन करने के बाद उन्होंने नजदीक के वनीकरण क्षेत्र का दौरा भी किया और वहां के विकास कार्यों का जायजा लिया. इस वीवीआईपी दौरे को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे. स्पेशल एस्कॉर्ट ग्रुप ने उन्हें कड़ी सुरक्षा मुहैया कराई. किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए डभोड़ा में खेरालू नगर पालिका की फायरब्रिगेड टीम और स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस टीम पूरी तरह से स्टैंडबाय रही.

दुनिया के 19वें सबसे अमीर आदमी
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, गौतम अडानी 92.6 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के 19वें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. वह उद्यगोपति मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए भारत और एशिया के सबसे रईस व्यक्ति भी बने हैं. मुकेश अंबानी 90.8 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ विश्व में 20वें स्थान पर हैं. इस मामले में मुकेश अंबानी पिछले काफी समय से गौतम अडानी से आगे चल रहे थे.

तारंगा जैन तीर्थ का महत्व
मेहसाणा का तारंगा जैन तीर्थ, जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजितनाथ को समर्पित है. मान्यता है कि भगवान अजितनाथ का जन्म अयोध्या में राजा जितशत्रु और रानी विजया के घर हुआ था. 12वीं शताब्दी में बने इस मंदिर को सोलंकी शासक राजा कुमारपाल से जोड़ा जाता है. जैन धर्म के लोगों में इस पवित्र स्थल को लेकर बड़ी आस्था है. तारंगा जैन तीर्थ संस्कृति और भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्थल भी है. इस तीर्थ का नाम समय के साथ बदलता रहा है. इसे तरंगक पर्वत, तरंगनाग, तारणगिरि, और तारणगढ़ के नाम से भी जाना जाता है.

इनपुट: मनीष मिस्त्री

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