कूटनीति या अंतहीन इंतजार? ट्रंप की धमकी और ईरान के धैर्य के बीच फंसी महाडील – US Iran Negotiations Face Clash Strategies Military Tensions Rise Hormuz mdsb ntc


अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की दूसरी कोशिश एक बड़े कूटनीतिक टकराव की तरफ बढ़ रही है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘कोएर्सिव डिप्लोमेसी’ यानी दबाव की कूटनीति और ईरान की ‘लॉन्ग गेम’ रणनीति आपस में टकरा रही हैं. ट्रंप तत्काल समर्पण और बड़े नतीजों की मांग कर रहे हैं, जबकि ईरानी नेतृत्व समय लेने वाली प्रक्रिया में विश्वास रखता है.

मंगलवार को उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस के इस्लामाबाद रवाना होने की संभावना के बीच दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई और गहरी हो गई है. ईरान का मानना है कि अमेरिका के साथ समझौता करना व्यर्थ है क्योंकि वॉशिंगटन पिछले वादों से मुकर चुका है. इस कूटनीतिक खींचतान के बीच सैन्य तनाव भी बढ़ गया है.
होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी नौसेना द्वारा मालवाहक जहाजों पर फायरिंग और अमेरिकी नौसेना द्वारा एक ईरानी कंटेनर जहाज को जब्त करने की घटना ने युद्ध के खतरे को वास्तविक बना दिया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी है कि अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो अमेरिका उसके हर पावर प्लांट और पुल को नष्ट कर देगा.

होर्मुज में सैन्य दबाव की राजनीति

दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाइयों का उपयोग अपनी सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाने के लिए कर रहे हैं. ईरान यह दिखा रहा है कि वह जलमार्गों पर कंट्रोल रख सकता है, जबकि ट्रंप प्रशासन यह मैसेज दे रहा है कि वार्ता फेल होने पर वह जंग शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा. अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी जहाज की जब्ती और ट्रंप का ‘नो मोर मिस्टर नाइस गाय’ वाला बयान इसी रणनीति का हिस्सा है.

अगर यह वार्ता फेल होती है, तो आशंका है कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को और तेज कर सकता है. ट्रंप का दावा है कि उनका नया समझौता 2015 के जेसीपीओए (JCPOA) से कहीं बेहतर होगा, जिसे उन्होंने ‘परमाणु हथियार का रास्ता’ बताया था. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप की टीम के लिए ईरान के ‘लॉन्ग गेम’ को मात देना आसान नहीं होगा.

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