अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 11 अप्रैल को ईरान संग शांति वार्ता के पहले दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे थे. इस दौरान बेशक कोई भी पक्ष निर्णायक स्थिति पर नहीं पहुंचा था लेकिन एक घटना ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा.
पाकिस्तान के दौरे पर एक वायरल वीडियो में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ उपराष्ट्रपति वेंस को एक शख्स से मिलवाते हैं. यह शख्स पाकिस्तानी मूल का कारोबारी उमर फारूक जहूर था. नॉर्वे के अखबार Verdens Gang (VG) के मुताबिक, उमर नॉर्वे में करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोपों में लंबे समय से वॉन्टेड है.
ऐसे में वेंस और उमर की यह छोटी सी मुलाकात जांच के घेरे में है. ना केवल इसलिए कि जहूर वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के साथ दिखाई दिए, बल्कि इसलिए भी कि विभिन्न देशों में उनकी छवि बिल्कुल अलग-अलग है. एक तरफ जहां नॉर्वे में उन्हें भगोड़ा माना जाता है, वहीं पाकिस्तान में उन्हें हिलाल-ए-इम्तियाज यानी देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया है. स्विट्जरलैंड में भी जहूर कथित संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों को लेकर जांच के दायरे में रहे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि तोशाखाना मामले में व्हिसलब्लोअर के रूप में भी उन्हें सम्मानित किए जाने पर विचार किया गया था. इस मामले में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में हैं. पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर, इमरान खान को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानते हैं, जिससे जहूर की राजनीतिक नजदीकियों का संकेत मिलता है.
नॉर्वे और स्विट्जरलैंड में उमर जांच के दायरे में क्यों?
उमर का जन्म नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में सियालकोट मूल के माता-पिता के घर हुआ था. वह खुद को एक कारोबारी और निवेशक बताते हैं और मौजूदा समय में दुबई में रहते हैं. हालांकि, नॉर्वे की एजेंसियां उन्हें गंभीर वित्तीय अपराधों से जुड़ा भगोड़ा मानती हैं.
VG के अनुसार, उन्हें पहली बार 2003 में सजा हुई थी. जब ओस्लो की अदालत ने उन्हें अपनी ही ट्रैवल एजेंसी से एयरलाइन टिकटों के गबन के लिए एक साल की सजा सुनाई. वह सजा सुनाए जाने के बाद अदालत में पेश नहीं हुए और देश छोड़ दिया. बाद में यह सजा 10 साल में समाप्त हो गई.
इसके बाद और गंभीर आरोप लगे. 2010 से नॉर्वे पुलिस उन्हें Nordea Bank से जुड़े एक बड़े धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलाश रही है. आरोप है कि इस मामले में छह करोड़ नॉर्वेजियन क्रोनर से अधिक की रकम हड़पी गई. हालांकि, जहूर इन आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं.
स्विट्जरलैंड में भी 2004 में उन पर एक फर्जी बैंक बनाकर लगभग दो करोड़ डॉलर की धोखाधड़ी का आरोप लगा था. इस मामले में उनके एक सहयोगी को सजा हुई, लेकिन जहूर गिरफ्तार नहीं हुए.
पाकिस्तान से क्या है जहूर का संबंध?
यूरोप में उन पर लगे आरोपों के बावजूद, पाकिस्तान में जहूर की छवि अलग है. उन्हें विदेशी निवेश लाने का श्रेय दिया जाता है. एक समय इंटरपोल का रेड नोटिस भी उनके खिलाफ जारी हुआ था, जो पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी के अनुरोध पर था लेकिन 2022 में यह नोटिस वापस ले लिया गया और जांच भी सबूतों के अभाव में बंद कर दी गई.
मार्च 2025 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उन्हें हिलाल-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया. यह सम्मान उन्हें बुनियादी ढांचे, आईटी, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लगभग 70 करोड़ डॉलर के निवेश लाने के लिए दिया गया.
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें तोशाखाना मामले में व्हिसलब्लोअर के रूप में भी सराहा गया, जिसमें आरोप था कि इमरान खान ने सरकारी तोहफे जैसे एक महंगी घड़ी बेच दी थी, जिसे जहूर ने लगभग बीस लाख डॉलर में खरीदने का दावा किया था.
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