उत्तर प्रदेश समाचार: मेरठ के परतापुर स्थित आर्यावर्त अस्पताल में डॉक्टरों ने 65 वर्षीय वेद प्रकाश के पित्त की थैली का ऑपरेशन बीच में ही रोक दिया. दरअसल, मंगलवार दोपहर 12 बजे मरीज को ओटी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने पेट में चीरा तो लगाया लेकिन पथरी तक न पहुंच पाने की बात कहकर प्रक्रिया बंद कर दी. डॉक्टर विवेक बंसल और डॉक्टर मलेश शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने बिना सर्जरी पूरी किए टांके लगा दिए और तीमारदारों को सही जानकारी नहीं दी. फिलहाल मरीज बेहोशी की हालत में है और परिजन डॉक्टर का लाइसेंस रद्द करने की मांग करते हुए हंगामा कर रहे हैं.
‘हमसे नहीं होगा ऑपरेशन, जो करना है कर लो’
मरीज के दामाद विजय कुमार ने बताया कि ससुर के पेट में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था. सभी जांचें पूरी होने के बाद ही ऑपरेशन शुरू हुआ, लेकिन बीच में ही डॉक्टर ने यह कहकर हाथ खींच लिए कि ऑपरेशन सक्सेसफुल नहीं होगा. परिजनों का आरोप है कि पूछने पर डॉक्टरों ने अभद्रता की और कहा कि ‘जो होता हो वो कर लो, ऑपरेशन नहीं होगा.’ इस लापरवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें परिजन तड़पते हुए बुजुर्ग के लिए न्याय मांग रहे हैं.
सीखने वाले डॉक्टरों पर लगाया आरोप
परिजनों का गंभीर आरोप है कि अनुभवी डॉक्टरों के बजाय सीखने वाले लोगों से ऑपरेशन कराया जा रहा था, जिसकी वजह से मरीज का ‘सत्यानाश’ कर दिया गया. मरीज अभी होश में नहीं आया है, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई है. विजय कुमार का कहना है कि वे इस मामले में पुलिस को तहरीर देंगे और मुकदमा दर्ज कराएंगे. उन्होंने मांग की है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार डॉक्टरों का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने मरीज के जीवन के साथ खिलवाड़ किया है.
मेरठ सीएमओ का क्या है कहना?
इस पूरे विवाद पर मेरठ के सीएमओ डॉक्टर अशोक कटारिया ने बताया कि फिलहाल उनके पास कोई लिखित शिकायत नहीं आई है. हालांकि, मामला उनके संज्ञान में आया है. सीएमओ ने आश्वासन दिया कि शिकायत मिलते ही पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन रूम में क्या हुआ और सर्जरी क्यों छोड़ी गई, इसकी सही वजह वहां मौजूद डॉक्टर ही स्पष्ट कर पाएंगे.
—- समाप्त —-

