झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में एक बार फिर पुराने बम मिलने से हड़कंप मच गया. स्वर्णरेखा नदी के तट पर 15 अप्रैल को ग्रामीणों को एक संदिग्ध वस्तु दिखाई दी, जिसकी सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को दी गई. प्रारंभिक जांच में इसे दूसरे विश्व युद्ध का बम माना गया, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सेना को बुलाया गया.
सूचना मिलते ही सेना की बम निरोधक टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने आसपास के गांवों को खाली करा लिया और लोगों को नदी किनारे से करीब दो किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया. किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए मीडिया को भी घटनास्थल से दूर रखा गया.
बुधवार सुबह सेना के विशेषज्ञों ने बम को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की. इसके लिए नदी किनारे गड्ढा खोदा गया. इसके बाद बम को सावधानीपूर्वक उसमें रखा गया और चारों तरफ बालू से भरे बोरों की मजबूत परत बनाई गई. ऊपर से भी 300 -400 बालू के बोरे रखकर उसे पूरी तरह से ढंक दिया गया, ताकि यदि विस्फोट हो तो उसका प्रभाव बाहर न फैल सके.
काफी सतर्कता और तकनीकी प्रक्रिया के बाद आखिरकार बम को सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज कर दिया गया. अधिकारियों का मानना है कि यह बम संभवतः दूसरे विश्व युद्ध के समय का हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. बता दें कि इसी इलाके में महीने भर पहले भी ऐसा ही एक बम बरामद हुआ था.
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन इलाके में कुछ समय तक दहशत का माहौल बना रहा. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसी कोई भी संदिग्ध वस्तु मिलने पर तुरंत सूचना दें और खुद से छेड़छाड़ न करें.
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