अमेरिका ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया में ईरान के साथ संघर्ष कब तक चलेगा, इसको लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद फैसला करेंगे. इस मामले में ट्रंप ने कोई टाइमलाइन तय नहीं की है, लेकिन संघर्ष का अंत अमेरिकी राष्ट्रीय हितों और वहां के लोगों की भलाई के आधार पर तय होगा. व्हाइट हाउस का कहना है कि मौजूदा वक्त में सैन्य और जमीनी हमलों पर सीजफायर लागू है, जबकि अमेरिका ईरान की ओर से शांति प्रस्ताव का इंतजार कर रहा है.

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बुधवार को वाशिंगटन में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि इस वक्त संघर्ष के लिए कोई निश्चित टाइमलाइन नहीं है, क्योंकि जमीनी स्तर पर घटनाक्रम लगातार बदल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ही इस संघर्ष की टाइमलाइन तय करेंगे और वो ऐसा तब करेंगे, जब उन्हें लगेगा कि ये अमेरिका या वहां के लोगों की भलाई के लिए है.

व्हाइट हाउस ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें ईरान को तीन से पांच दिन की समयसीमा देने का दावा किया गया था. लेविट ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने संघर्ष या होर्मुज की नाकाबंदी खत्म करने के लिए कोई निश्चित डेडलाइन सेट नहीं की है.
उन्होंने कहा कि समयसीमा को लेकर चल रही तमाम खबरें गलत हैं. राष्ट्रपति तभी अगला कदम उठाएंगे, जब उन्हें लगेगा कि यह अमेरिका के सर्वोत्तम हित में है.

उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वर्तमान नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) से संतुष्ट हैं और मानते हैं कि ईरान वर्तमान में बहुत कमजोर स्थिति में है. कार्ड अभी राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में हैं.

व्हाइट हाउस ने ईरान की ओर से आ रहे संदेशों पर सावधानी बरतने की सलाह दी है. लेविट ने कहा कि ईरान सार्वजनिक रूप से जो कहता है और निजी बातचीत में जो स्वीकार करता है, उसमें बहुत बड़ा अंतर है. उन्होंने आगाह किया कि ईरान के सार्वजनिक बयानों को उनके अंकित मूल्य पर नहीं लिया जाना चाहिए. अमेरिकी खुफिया एजेंसी और बातचीत करने वाली टीम को पता है कि असल में पर्दे के पीछे क्या चल रहा है.

लेविट के अनुसार, मौजूदा संकट ईरान के अंदर ‘शांति प्रिय और कट्टरपंथियों’ के बीच चल रही एक आंतरिक जंग को भी दिखाता है. इसी आंतरिक कलह और विभाजन के कारण अमेरिका को अब तक एक एकीकृत प्रस्ताव नहीं मिला है. राष्ट्रपति चाहते हैं कि ईरान के सभी पक्ष मिलकर एक साझा प्रस्ताव पेश करें. तब तक ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ के तहत आर्थिक दबाव और नाकाबंदी का सिलसिला जारी रहेगा.

उन्होंने  ये भी बताया कि भले ही सैन्य हमले रुके हुए हों, लेकिन ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध जारी है. सफल नौसैनिक नाकाबंदी के जरिए ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले और वहां से आने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है. लेविट ने कहा कि बीतते हर पल के साथ ईरान आर्थिक और वित्तीय रूप से टूट रहा है. ट्रंप प्रशासन ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ स्पष्ट कर दी हैं और वो किसी भी हाल में अमेरिकी हितों से समझौता नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व को प्रस्ताव तैयार करने के लिए थोड़ी फ्लेक्सिबिलिटी दी है. व्हाइट हाउस का कहना है कि वह जानते हैं कि वो किन व्यक्तियों के साथ बातचीत कर रहे हैं, लेकिन ईरानी शासन के अंदर भारी दरारें हैं. पिछले पांच दशकों के कई नेता अब मारे जा चुके हैं. अमेरिका इस वक्त पूरी तरह हावी है, क्योंकि ईरान सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर पस्त हो चुका है.

व्हाइट हाउस का साफ है कि कमान पूरी तरह ‘कमांडर-इन-चीफ’ यानी डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में है. वह स्वतंत्र दुनिया का नेतृत्व करते हुए ईरान के जवाब का इंतजार कर रहे हैं. जब तक ईरान अपनी आंतरिक गुटबाजी खत्म कर एक ठोस और एकीकृत प्रस्ताव लेकर नहीं आता, तब तक अमेरिका अपनी मजबूत स्थिति और नाकाबंदी को छोड़ने वाला नहीं है. संघर्ष का अंत कब होगा, ये केवल ट्रंप ही तय करेंगे.

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