भारत में एक ऐसी जगह छिपी है जहां न सिर्फ रोड खत्म होगी, बल्कि आपको भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर ऐसा सुकून मिलता है जिसकी तलाश हर नोएडा-दिल्ली में रहने वाला व्यक्ति करता है. हिमाचल की वादियों में छुपा एक छोटा सा छितकुल सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि भारत का आखिरी गांव है. ये धरती पर रहते हुए जन्नत का एहसास कराता है.
छितकुल में कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो किसी ने भागती-दौड़ती जिंदगी का पॉज बटन दबा दिया हो. सामने चांदी की तरह चमकते बर्फ के ऊंचे-ऊंचे पहाड़, बगल से संगीत सुनाती बस्पा नदी की ठंडी लहरें और हवा बिल्कुल साफ. ये उन लोगों के लिए जन्नत है जो अपनी घड़ी की सुइयों और मोबाइल के नोटिफिकेशन से थक चुके हैं. चलिए जानते हैं भारत के उस आखिरी गांव के बारे में, जो आपकी थकान को मिनटों में भागने का काम कर सकता है.
कहां है छितकुल?
छितकुल, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में बसा एक बेहद खूबसूरत गांव है. ये उन लोगों के लिए परफेक्ट है, जो कुछ दिन शहर की भागदौड़ से दूर शांति से रहना चाहते हैं. ये भारत-तिब्बत बॉर्डर के पास आखिरी बसा और आबाद गांव माना जाता है, जहां तक लोग बिना किसी परमिट के आसानी से पहुंच सकते हैं. समुद्र तल से करीब 3,450 मीटर की ऊंचाई पर बसा ये गांव बास्पा नदी के किनारे बसा है. यहां लोगों को चारों तरफ बर्फ से ढके पहाड़ों के नजारे देखने को मिलते हैं.
छितकुल इतिहास के नजरिए से भी बहुत खास रहा है. ये कभी पुराने हिंदुस्तान-तिब्बत व्यापार मार्ग का हिस्सा हुआ करता था. यही वजह है कि यहां आपको नेचुरल खूबसूरती के साथ-साथ इतिहास की झलक भी देखने को मिलती है.
सुंदरता के मामले में यूरोप से भी है आगे
छितकुल की सबसे बड़ी खासियत उसकी प्राकृतिक सुंदरता है, जो किसी का भी दिल आसानी से जीत सकती है. यहां पहुंचकर आप जिस भी दिशा में नजर घुमाते हैं, तो हर नजारा ऐसा लगता है जैसे कोई खूबसूरत पेंटिंग हो. चारों तरफ बर्फ से ढकी ऊंची-ऊंची पहाड़ियां, हरे-भरे मैदान और सेब के बाग देखने को मिलते हैं. इसके साथ ही बास्पा नदी का साफ और ठंडा पानी पूरे माहौल में एक अलग ही सुकून घोल देता है. यही वजह है कि कई लोग छितकुल को प्यार से भारत का स्विट्जरलैंड भी कहते हैं.
अगर आप शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से अलग गांव के सादे जीवन का मजा लेना चाहते हैं तो आपको छितकुल जरूर जाना चाहिए. सर्दियों में यहां इतनी बर्फबारी होती है कि लोग नीचे के इलाकों में चले जाते हैं. गांव में आज भी लकड़ी के पारंपरिक घर हैं और यहां की लाइफस्टाइल भी बिल्कुल गांव जैसी है. यहां उतने साधन नहीं हैं, लेकिन उसके बाद भी सब लोग बहुत खुश रहते हैं.
घूमने के लिए क्या-क्या है?
छितकुल में घूमने और करने के लिए बहुत कुछ है. आप यहां पर
- बस्पा नदी के किनारे बैठकर ठंडे-ठंडे बहते पानी और हवा का आनंद ले सकते हैं.
- अगर आपको ट्रेकिंग करना पसंद है, तो यहां बहुत सी जगहें हैं, जो आपको प्रकृति के बीच टहलने का मौका देती हैं.
- आप यहां के स्थानीय लोगों से मिलकर और उनके खान-पान को समझकर वहां की लाइफस्टाइल का मजा ले सकते हैं.
- आप यहां स्थित पास के खूबसूरत गांव घूम सकते हैं. यहां का हर नजारा आपको प्रकृति के करीब ले जाता है.
कैसे पहुंचे छितकुल?
आप छितकुल फ्लाइट से, ट्रेन से और सड़क तीनों से जा सकते हैं.
1. फ्लाइट से कैसे पहुंचे छितकुल: अगर आप फ्लाइट से छितकुल जाना चाहते हैं तो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट शिमला एयरपोर्ट है, जो इससे लगभग 267 किमी दूर है. आपका दूसरा ऑप्शन भुनटार एयरपोर्ट है. अगर आपको छितकुल पहुंचना है तो आपके लिए सबसे अच्छा ऑप्शन चंडीगढ़ एयरपोर्ट से फ्लाइट लेना है. यहां से ये गांव लगभग 358 किमी दूर है. एयरपोर्ट से आगे आपको टैक्सी या बस से संगला/छितकुल जाना होगा.
2. ट्रेन से: सबसे आसान ऑप्शन चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन है. यहां से बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती है. इस रास्ते में पहाड़ों के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं.
3. सड़क से: हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बसें शिमला, दिल्ली और चंडीगढ़ से मिल जाती हैं. पहले संगला या रेकॉन्ग पीओ पहुंचें, फिर वहां से बस/टैक्सी लेकर छितकुल जाएं. रोड ट्रिप के लिए दिल्ली/चंडीगढ़ → शिमला → नारकंडा → कर्चम → संगला → रकछम → छितकुल (लगभग 600 किमी) सबसे आसान रूट है.
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