टी20 क्रिकेट को अक्सर रफ्तार, ताकत और ताबड़तोड़ शॉट्स का खेल कहा जाता है. यहां वक्त नहीं होता, ठहराव नहीं होता, सिर्फ हमला और जवाब होता है. रवींद्र जडेजा ने एक बार फिर साबित किया कि क्रिकेट सिर्फ ताकत का नहीं, समझ और धैर्य का भी खेल है. और कभी-कभी, सबसे बड़ी जीत वही दिलाता है जो सबसे ज्यादा इंतजार करना जानता है.

बुधवार को जब आईपीएल मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स (RR) की पारी लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के खिलाफ 62/4 पर लड़खड़ा रही थी, तब हर गेंद के साथ दबाव बढ़ता जा रहा था. पिच आसान नहीं थी, गेंद स्विंग भी कर रही थी और सीम भी. बड़े शॉट खेलने की कोशिश, विकेट गंवाने का न्योता बन सकती थी. ऐसे में जडेजा क्रीज पर आए, लेकिन उनके चेहरे पर कोई जल्दबाजी नहीं थी. जैसे उन्हें पता हो कि यह लड़ाई एक ही वार में नहीं जीती जाएगी.

उन्होंने शुरुआत में खुद को रोके रखा. गेंद दर गेंद हालात को समझा. 24 गेंदों तक बाउंड्री का इंतजार… आज के टी20 में यह असामान्य है, लेकिन जडेजा के लिए यह एक रणनीति थी. हर सिंगल, हर डबल के साथ वो सिर्फ रन नहीं जोड़ रहे थे, बल्कि पारी को टूटने से बचा रहे थे.

शिमरॉन हेटमायर ने कुछ देर के लिए आक्रामक रुख अपनाया, लेकिन उनके आउट होते ही फिर से जिम्मेदारी जडेजा के कंधों पर आ गई. इस बीच डोनोवन फरेरा और शुभम दुबे के साथ छोटी-छोटी साझेदारियां बनीं. ये साझेदारियां भले ही स्कोरबोर्ड पर बहुत बड़ी न दिखें, लेकिन उस वक्त ये टीम के लिए ऑक्सीजन की तरह थीं.

जडेजा की बल्लेबाजी में एक खास बात हमेशा रही है- वो हालात के हिसाब से खुद को ढाल लेते हैं. जहां दूसरे बल्लेबाज अपनी शैली पर टिके रहते हैं, वहीं जडेजा खेल की जरूरत के मुताबिक अपनी गति बदलते हैं. यही वजह है कि चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए खेलते हुए भी उन्होंने कई बार आखिरी ओवरों में मैच पलटे हैं. 2021 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ वह 19वें ओवर के बाद 21 गेंदों पर 26 रन बनाकर खेल रहे थे, लेकिन आखिरी ओवर में हर्षल पटेल को 37 रन ठोककर मैच का रुख पलट दिया.

2024 में पंजाब किंग्स के खिलाफ जडेजा ने आखिरी ओवर में 12 अहम रन जोड़कर चेन्नई सुपर किंग्स का स्कोर 167 तक पहुंचाया. इसके बाद उन्होंने गेंदबाजी में भी योगदान देते हुए उस स्कोर को डिफेंड कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह उनके हालिया मैच-विनिंग ऑलराउंड प्रदर्शनों में से एक रहा.

इस मैच में भी कहानी कुछ ऐसी ही रही. जब पारी का आखिरी ओवर आया, तब स्कोर 139/6 था… न तो बहुत खराब, न ही बहुत मजबूत. लेकिन सामने थे तेज गेंदबाज मयंक यादव. जडेजा ने पहली ही गेंद पर बाउंड्री लगाई, यह उनकी पारी की पहली बाउंड्री थी. जैसे उन्होंने पूरे इंतजार का हिसाब एक ही पल में बराबर कर दिया हो. इसके बाद उन्होंने रुकना नहीं चुना. पुल और सीधे शॉट्स के साथ 20 रन बटोरे और टीम को 159 तक पहुंचा दिया.

यह सिर्फ रन नहीं थे, यह उस धैर्य का इनाम था जो उन्होंने पूरी पारी में दिखाया था. गेंदबाजी में भी जडेजा ने वही समझ दिखाई. निकोलस पूरन जैसे खतरनाक बल्लेबाज को आउट करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब आप खुद लेफ्ट-आर्म स्पिनर हों और सामने भी लेफ्ट-हैंडर हो. लेकिन जडेजा ने अपनी गति में बदलाव किया, लाइन को थोड़ा बाहर रखा और आखिरकार पूरन को गलती करने पर मजबूर कर दिया.

आर-जडेजा
राजस्थान रॉयल्स में ‘सर’ जडेजा एक बड़ा नाम. (Photo @BCCI)

उस विकेट के बाद मैच का रुख पूरी तरह बदल गया. जडेजा का जश्न- ‘पॉकेट’ सेलिब्रेशन… सिर्फ एक मजाकिया पल नहीं था, बल्कि उस आत्मविश्वास की झलक थी जो उन्होंने अपनी मेहनत से कमाया था.

इस सीजन में भी उन्होंने पहले सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुश्किल हालात में 45 रन बनाकर टीम को संभाला था. उस पारी ने भी यही दिखाया था कि जब टॉप ऑर्डर विफल हो जाए, तब मिडिल ऑर्डर का अनुभव कितना अहम होता है.

जडेजा की यह पारी सिर्फ एक स्कोरकार्ड एंट्री नहीं है. यह एक याद दिलाने वाली कहानी है कि हर चमक तेज नहीं होती, और हर जीत जोर से नहीं आती. कुछ जीतें धीरे-धीरे बनती हैं, हर गेंद के साथ, हर फैसले के साथ. और जब वो जीत मिलती है, तो सिर्फ मैच नहीं जिताती.. दिल भी जीत लेती है.

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