केदारनाथ हेली सेवा: मात्र 90 मिनट में ‘हाउसफुल’ हुईं 31 हजार सीटें, बुकिंग में इस राज्य के लोग रहे सबसे आगे – kedarnath heli shuttle booking full record 90 minutes maharashtra toppers lcln


बाबा केदारनाथ के दर्शनों की चाह रखने वाले श्रद्धालुओं में हेलीकॉप्टर सेवा को लेकर जबरदस्त क्रेज देखने को मिला है. शनिवार को आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 22 अप्रैल से 15 जून तक के लिए उपलब्ध हेलीकॉप्टर शटल सेवा की सभी 31 हजार 450 सीटें पोर्टल खुलने के महज 90 मिनट के भीतर बुक हो गईं.

अधिकारियों के अनुसार, बुकिंग प्रक्रिया 15 अप्रैल को शाम 6 बजे शुरू हुई और रात 7.28 बजे तक आखिरी टिकट जारी कर दिया गया. उन्होंने बताया कि इस दौरान आधिकारिक IRCTC पोर्टल के जरिए कुल 10,855 टिकट जारी किए गए.

यह हेलीकॉप्टर शटल सेवा तीर्थयात्रियों को बेस कैंप से हिमालयी तीर्थस्थल तक हवाई मार्ग से जोड़ती है. यह सेवा गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी से संचालित होती है, ताकि 16 किमी की कठिन चढ़ाई को आसान बनाया जा सके.

उत्तराखंड पर्यटन विभाग के हेल्पलाइन कॉल सेंटर ने इस प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए 565 रैंडम वेरिफिकेशन कॉल किए. अधिकारियों ने पाया कि इस्तेमाल किए गए 10 हजार 859 मोबाइल नंबरों में से 4 हजार 400 नंबर असली यात्रियों से मेल खाते थे.

90 मिनट में खेल खत्म

विश्लेषण से पता चला कि 51 प्रतिशत बुकिंग सीधे तीर्थयात्रियों ने की थी. विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाकी 49 प्रतिशत बुकिंग अन्य अधिकृत माध्यमों से की गई थी.

सबसे ज्यादा बुकिंग शाम 6.10 बजे से 6.32 बजे के बीच हुई. शाम 6.10 बजे सिस्टम में 849 बुकिंग दर्ज की गईं, जिसके बाद अगले 20 मिनट में बुकिंग की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई.

बुकिंग चार्ट में महाराष्ट्र ने मारी बाजी

राज्यों के हिसाब से बुकिंग चार्ट में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा, जहां 1708 सफल बुकिंग हुईं. अन्य प्रमुख बुकिंग उत्तर प्रदेश (1,243), दिल्ली (867), तेलंगाना (864), कर्नाटक (801) और गुजरात (700) से हुईं.

बुकिंग के लिए सख्त नियम

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, राज्य सरकार ने हर यूजर के लिए बुकिंग की सीमा दो और सीटों की सीमा 12 तय की थी. एक IP एड्रेस से सिर्फ पांच यूजर ID इस्तेमाल करने की अनुमति थी, और हर बुकिंग में ज्यादा से ज्यादा 6 यात्रियों को शामिल किया जा सकता था.

विभाग ने बताया कि अब तक 510 बुकिंग आईडी के तहत कुल 913 सीटें रद्द भी की जा चुकी हैं. अधिकारियों का दावा है कि इस पारदर्शी प्रक्रिया से फर्जीवाड़े पर लगाम लगी है और वास्तविक तीर्थयात्रियों को हिमालयी मंदिर तक पहुंचने में आसानी होगी.

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