ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के ओमान की यात्रा पूरी करने के बाद पाकिस्तान लौटने सकते हैं और इसके बाद उनके रूस रवाना होने की उम्मीद है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरानी मीडिया रिपोर्ट के हवाले से ये जानकारी दी है और कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर क्षेत्रीय कूटनीति तेज हो गई है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका-ईरान में फिर से कूटनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसी के लिए ईरानी विदेश मंत्री अराघची ओमान यात्रा पूरी कर फिर से पाकिस्तान लौट सकतें हैं. इसके बाद वह यहां से रूस के लिए रवाना होंगे.

दरअसल, अराघची शनिवार को पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और वरिष्ठ अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात के बाद बिना किसी ठोस नतीजे के इस्लामाबाद से ओमान की राजधानी मस्कट के लिए रवाना हो गए थे.

प्राप्त जानकारी के अनुसार,पाकिस्तान दौरे के दौरान अराघची ने पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार से अलग-अलग बैठकें कीं, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय हालातों पर चर्चा की. उन्होंने संघर्ष पर तेहरान का रुख भी स्पष्ट किया, जिसके लिए ईरान अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों को जिम्मेदार ठहराया है.

अराघची ने अपने पाकिस्तान दौरे को बेहतर बताया और कहा कि उन्होंने युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के मुद्दे पर ईरान का रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने अमेरिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अमेरिका वास्तव में कूटनीति को लेकर गंभीर है.

ट्रंप ने रद्द किया डेलीगेशन का Pak दौरान

एक ओर जहां कूटनीतिक दौरे जारी हैं. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के रुख से नाराजगी जताते हुए यूएस प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया.

ट्रंप का कहना है कि वह 18 घंटे की लंबी उड़ान भरकर ऐसी वार्ताओं में समय बर्बाद नहीं करेंगे, जिनका कोई नतीजा नहीं निकल रहा है. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका फायदे की स्थिति में है और ईरान को यदि बातचीत करनी है तो उसे सीधे संपर्क करना होगा. इस फैसले ने शांति वार्ता की प्रक्रिया को एक बार फिर से अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है.

पेजेशकियन ने दी चेतावनी

दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका को ‘तबास की ऐतिहासिक हार’ की याद दिलाई है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि तबास (रेगिस्तानी क्षेत्र) में अमेरिका को जो विफलता मिली थी, वैसी ही स्थिति इस साल दक्षिणी इस्फ़हान में भी देखने को मिली है. उन्होंने चेतावनी दी कि ये घटनाएं वैश्विक शक्तियों के लिए सबक हैं. उन्होंने कहा कि “तबास की रेत का खुदा” इस भूमि के लोगों का रक्षक है. ये बयान ईरान के उस रुख को दिखाता है, जिसमें वह अमेरिका की किसी भी ‘अत्यधिक मांग’ को मानने से इनकार कर रहा है.

अब उनके वापस पाकिस्तान लौटने की संभावनाओं ने क्षेत्रीय कूटनीति में नई गतिविधियां शुरू हो सकती हैं. हालांकि, ईरान अभी-भी अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है तो ट्रंप ने भी अपने तेवर तीखे कर दिए हैं, जिसके कारण दूसरे दौर की वार्ता अभी-भी अनिश्चित बनी हुई है.

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