उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और देश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे अब लगभग तैयार है. ‘आजतक’ की टीम ने इस एक्सप्रेसवे पर ग्राउंड रिपोर्ट करते हुए 594 किलोमीटर की दूरी करीब 6 घंटे में तय की. यह सफर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूरा किया गया.

आपको बता दें कि 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे देश का एक साथ ग्रीनफील्ड क्षेत्र में बनने वाला सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे है. यह 12 जिलों और 519 गांवों को जोड़ता है. हर जिले तक पहुंचने के लिए इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे किसी भी दिशा में राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों से सीधा जुड़ाव संभव है. दिल्ली के इंडिया गेट से बिहार तक सीधा जय जा सकता है इसके जरिए.

हमारी यात्रा प्रयागराज के शुरुआती प्वाइंट से शुरू हुई. सुबह करीब 11 बजे बनारस-कानपुर हाइवे से गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले पहले गेट से हमने सफर की शुरुआत की. आगे बढ़ते ही धनुष के आकार का भव्य और आधुनिक टोल प्लाजा दिखाई दिया, जो बेहद आकर्षक बना हुआ है.

टोल प्लाजा के कंट्रोल रूम में जाकर पता चला कि यहां सिर्फ टोल वसूली ही नहीं, बल्कि हाईटेक कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी. बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों तक का चालान सीधे उनके पते पर पहुंच सकेगा.

गंगा एक्सप्रेसवे की सबसे खास बात इसका मल्टीपल इंटरचेंज सिस्टम है. यहां से वाहन चालक किसी भी दिशा में मुड़कर किसी भी स्टेट हाइवे या नेशनल हाईवे पर जा सकते हैं. जरूरत पड़ने पर यू-टर्न लेकर वापस लौटने की भी सुविधा है.

आगे बढ़ने पर हर 50 से 55 किलोमीटर पर आधुनिक फूड प्लाजा दिखाई दिए. इनमें फूड कोर्ट, कैफेटेरिया, देशी ढाबा, बच्चों के लिए प्ले एरिया, पेट्रोल पंप, सीएनजी स्टेशन और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाए गए हैं. बड़ी और छोटी गाड़ियों के लिए अलग-अलग सुविधाएं दी गई हैं. यहां 400 वाहनों की पार्किंग क्षमता है, जबकि ट्रक और बस चालकों के लिए चार्जिंग सुविधा और मुफ्त डॉर्मेट्री भी उपलब्ध है.

फूड प्लाजा के अंदर कई बड़ी कंपनियों के आउटलेट, आइसक्रीम पार्लर और रिटेल स्टोर भी बनाए गए हैं.

यात्रा के दौरान एक्सप्रेसवे पर ICU सुविधा वाले अस्पताल और एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस भी देखने को मिलीं. गंभीर मरीजों का तत्काल इलाज यहीं किया जा सकेगा. हर 20 किलोमीटर पर एक पुलिस वाहन और एक एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है.

कुछ देर बाद हमने खुद गाड़ी चलाकर एक्सप्रेसवे का अनुभव लिया. सड़क इतनी स्मूद थी कि गाड़ी बिना किसी कंपन के आराम से दौड़ती नजर आई.

शाहजहांपुर के पास करीब 3 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप बनाई गई है, जहां आपात स्थिति में लड़ाकू विमान उतर सकते हैं. यह गंगा एक्सप्रेसवे का सबसे शानदार हिस्सा नजर आया. यहां सुखोई जैसे फाइटर जेट भी उतारे जा सकते हैं.

शाम होते-होते हमने 457 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी. इसके बाद IRB कंपनी द्वारा बनाए गए हाईटेक टोल प्लाजा पर पहुंचे, जहां बैरियरलेस ऑटोमैटिक टोल सिस्टम लगा है. इसमें वाहन बिना रुके 120 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकते हैं और टोल अपने आप कट जाएगा. यह व्यवस्था फिलहाल ट्रायल बेसिस पर है, जिसे भविष्य में अन्य टोल प्लाजा पर भी लागू किया जाएगा.

आगे बढ़ते हुए हम हापुड़ में गंगा नदी पर बने शानदार पुल तक पहुंचे. यह पुल पूरी तरह स्मूद, मजबूत और बिना किसी कंपन के बना हुआ है.

यहीं एक्सप्रेसवे की सबसे यूनिक सुरक्षा तकनीक भी देखने को मिली. सड़क के दोनों किनारों पर व्हाइट अलर्ट स्ट्रिप लगाई गई है. यदि किसी चालक को झपकी आए और वाहन इन स्ट्रिप्स पर चढ़ जाए, तो तेज कंपन और आवाज पैदा होगी, जिससे चालक तुरंत सतर्क हो जाएगा और दुर्घटना टल सकेगी. हमने इसे खुद कार में बैठकर और बाहर से भी जांचा.

गंगा एक्सप्रेसवे की सड़क इतनी स्मूद इसलिए है क्योंकि इसमें लंबे-लंबे बिना जोड़ वाले पेवमेंट का इस्तेमाल किया गया है, जिससे झटके और कंपन महसूस नहीं होते.

रात करीब 12:30 बजे हम मेरठ पहुंचे, जो गंगा एक्सप्रेसवे का अंतिम प्वाइंट है. यहीं हमारी यह लंबी यात्रा समाप्त हुई.

इस सफर के दौरान हमने यह भी देखा कि गंगा एक्सप्रेसवे आगरा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुरादाबाद हाइवे से भी जुड़ा हुआ है. यानी दिल्ली से करीब 78 किलोमीटर दूर इस एक्सप्रेसवे पर चढ़कर सीधे प्रयागराज तक पहुंचा जा सकता है.

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