बॉलीवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले अब पंचतत्व में विलीन हो चुकी हैं. 13 अप्रैल की शाम उनका अंतिम संस्कार किया गया. बेटे आनंद ने अपनी मां को मुखाग्नि दी और हमेशा के लिए अलविदा कहा. ये वक्त उनके पूरे परिवार के लिए काफी नाजुक और दुख से भरा था. आशा जी को हर किसी ने भावपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की.

आशा भोसले ने अपनी आवाज से सिर्फ हिंदुस्तान की जनता को नहीं, बल्कि पाकिस्तान के लोगों को भी छुआ है. जब उनके निधन की खबर सामने आई थी, तो कई पाकिस्तानी आर्टिस्ट ने शोक जताया था. भले ही पाकिस्तानी कलाकारों के सोशल मीडिया इंडिया में बैन हैं, मगर उन्होंने तब भी आशा जी के लिए अपनी श्रद्धांजलि दी.

यहां तक कि एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो (Geo) न्यूज ने आशा जी के निधन की पूरी कवरेज भी की. मगर लगता है कि वहां की मीडिया बॉडी पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (PEMRA) को एक इंडियन आर्टिस्ट के निधन की कवरेज वाली बात रास नहीं आई. इसलिए उन्होंने जियो न्यूज को नोटिस भेज दिया.

पाकिस्तानी न्यूज चैनल को क्यों आया नोटिस?

पाकिस्तानी मीडिया बॉडी पीइएमआरए ने रविवार को एक नोटिस जारी किया. जिसमें कहा गया कि जियो न्यूज ने भोसले की मौत की खबर देते समय भारतीय गाने और भारतीय फिल्मों के वीडियो चला दिए. ये काम उन्होंने जानबूझकर किया, जबकि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कंटेंट दिखाना पूरी तरह बैन लगाया है.

पाकिस्तानी मीडिया बॉडी के एक्शन से नाखुश न्यूज चैनल

पीइएमआरए के इस फैसले से जियो न्यूज के मैनेजिंग डायरेक्टर अजहर अब्बास काफी नाखुश दिखे. X पर ट्वीट करते हुए उन्होंने इस खबर को कंफर्म किया और आशा भोसले के लिए लिखा, ‘हमेशा से ऐसा रिवाज रहा है कि जब किसी मशहूर कलाकार के बारे में खबर करते हैं, तो उनकी पुरानी अच्छी रचनाओं को फिर से याद किया और मनाया जाता है. बल्कि आशा भोसले जैसी बड़ी हस्ती के लिए तो हमें उनकी और भी ज्यादा अमर और यादगार गाने दिखाने चाहिए थे, जिसे हमने दिखाया. फिर भी, पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी ने इसे रोकने का फैसला किया है.’

‘आर्ट भी ज्ञान की तरह पूरी मानवता की साझी विरासत है. इसे देश की सीमाओं में बंद नहीं करना चाहिए. आशा भोसले खुद पाकिस्तान की प्रसिद्ध गायिका नूर जहां को बहुत मानती थीं. उन्होंने प्यार से उन्हें अपनी बड़ी बहन भी कहा था. आशा भोसले ने नुसरत फतेह अली खान के साथ भी काम किया और नसीर काजमी जैसे बड़े उर्दू शायरों की खूबसूरत कविताओं को गाकर जिंदा किया. जब जंग और लड़ाई के समय चल रहे हों, तब कला और कलाकारों को इसका शिकार नहीं बनना चाहिए. बुद्धिजीवी, संगीतकार और रचनाकार अक्सर वही लोग होते हैं जो नफरत और बंटवारे के खिलाफ आवाज उठाते हैं. वो ही लोग होते हैं जो लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं.’

आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ था. उन्हें चेस्ट इनफेक्शन और थकान के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया था. 11 अप्रैल की रात उनका इलाज शुरू हुआ, जिसके बाद उनकी हालत नाजुक बताई गई थी.

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