ग्रेटर नोएडा में वर्कर्स के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है. पूरे गौतम बुद्ध नगर जोन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है. ग्रेटर नोएडा में स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए खुद डीसीपी प्रवीन रंजन सिंह ने मोर्चा संभाला है.
उनके नेतृत्व में पीएसी और पुलिस बल के साथ औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार फ्लैग मार्च और पैदल गश्त की जा रही है. पुलिस टीम उन सभी स्थानों पर तुरंत पहुंच रही है, जहां से वर्कर्स के इकट्ठा होने या किसी तरह की गतिविधि की सूचना मिल रही है. आज भी इसी क्रम में डीसीपी ग्रेटर नोएडा ने कासना के साइट-5 क्षेत्र में भारी पुलिस बल के साथ फ्लैग मार्च किया. इस दौरान पुलिस ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.
प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) को भी सक्रिय रखा गया है. जैसे ही किसी जगह से भीड़ इकट्ठा होने की सूचना मिलती है, टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करती है.
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डीसीपी प्रवीन रंजन सिंह ने बताया कि पूरे ग्रेटर नोएडा जोन में स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण है. उन्होंने कहा कि हाल ही में शिव नाडर यूनिवर्सिटी के पास धरना प्रदर्शन की सूचना मिली थी, लेकिन मौके पर पहुंचकर पुलिस ने लोगों को समझाया, जिसके बाद सभी अपने-अपने कार्य पर लौट गए.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में कहीं भी कोई बड़ा धरना या प्रदर्शन नहीं चल रहा है और पूरी स्थिति नियंत्रण में है. पुलिस का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक शांति बनाए रखना और किसी भी प्रकार की अफवाह या असामाजिक गतिविधि को रोकना है.
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें. पुलिस ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहे, इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं. फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और पुलिस बल लगातार गश्त कर स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
जिलाधिकारी ने मीटिंग कर दिए दिशा-निर्देश
नोएडा में जिलाधिकारी मेधा रूपम ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों को साफ संदेश दिया है कि जो नियम हैं, उनका पालन करें, वरना कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. अब श्रमिकों के व्यवहार से लेकर उनके वेतन तक की पूरी जिम्मेदारी एजेंसियों की होगी. जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में आउटसोर्सिंग एजेंसियों और संविदाकारों को इस संबंध में चेतावनी दी गई है.
बैठक का मुख्य फोकस दो बातों पर रहा- श्रमिकों का व्यवहार और उनका वेतन. जिलाधिकारी ने साफ कहा कि अगर किसी एजेंसी के कर्मचारी या श्रमिक किसी तरह का उपद्रव करते हैं या माहौल बिगाड़ते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी केवल श्रमिकों की नहीं, बल्कि संबंधित एजेंसी की भी होगी. ऐसे मामलों में एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ उसका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है.
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