होर्मुज़ नाकाबंदी को लेकर चीन ने अमेरिका को दी चेतावनी, बोला- दखल न दें – China fires warning shot US over Hormuz blockade Do not interfere mdsb ntc

ByCrank10

April 13, 2026 , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


चीन के एक सीनियर अधिकारी ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट पर नाकाबंदी न करे और चीन के ईरान के साथ द्विपक्षीय संबंधों में दखल न दे. रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून की यह चेतावनी सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी शुरू होने के ठीक उसी वक्त आई. एडमिरल डोंग जून ने कहा, “हमारे ईरान के साथ व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे हमारे मामलों में दखल नहीं देंगे. होर्मुज़ स्ट्रेट चीन के लिए खुला रहेगा.

यह जलमार्ग बीजिंग के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इससे उसे अपने तेल का करीब 40 फीसदी और अपनी LNG ज़रूरतों का करीब 30 फीसदी हिस्सा मिलता है. इसलिए, चीन खाड़ी में इस अहम जलमार्ग को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष विराम पर ज़ोर दे रहा है.

कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप की नौसैनिक नाकाबंदी का निशाना चीनी युआन हो सकता है, जिसका इस्तेमाल कुछ जहाज़ खाड़ी के इस अहम जलमार्ग से गुज़रने के लिए करते हैं. इसे दशकों पुरानी पेट्रोडॉलर व्यवस्था के लिए एक चुनौती और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने का एक ज़रिया माना जाता है.

चीन ने किया सीजफायर का समर्थन

चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर सीजफायर के प्रति अपना समर्थन दोहराया है. मंत्रालय का तर्क है कि इस जलमार्ग की सुरक्षा, स्थिरता और बिना किसी रुकावट के आवाजाही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों को पूरा करती है.

SCMP ने प्रवक्ता गुओ जियाकुन के हवाले से कहा, “होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली आवाजाही में रुकावट की असली वजह ईरान से जुड़ा संघर्ष है और इस समस्या को सुलझाने का एकमात्र तरीका यह है कि जल्द से जल्द संघर्ष-विराम हो और आपसी दुश्मनी खत्म हो.”

उन्होंने यह भी कहा कि चीन मिडिल-ईस्ट में चल रहे संघर्ष को खत्म करने में एक सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है. यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां चीन, अमेरिका के साथ अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ में है.

ट्रंप ने किया नाकाबंदी का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ऐलान किया कि अमेरिकी नौसेना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट के जरिए ईरानी बंदरगाहों तक समुद्री पहुंच को अवरुद्ध कर देगी. ईरान के साथ उच्च स्तरीय वार्ता विफल होने के बाद तनाव में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.

अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि नाकाबंदी ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले सभी जहाजों को लक्षित करेगी. एक बयान में, सेंटकॉम ने कहा कि यह कदम ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों का उपयोग करने वाले सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू किया जाएगा. अमेरिकी सेना ने कहा कि नाकाबंदी गैर-ईरानी गंतव्यों के लिए स्ट्रेट से तटस्थ पारगमन मार्ग को बाधित नहीं करेगी.

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ईरान पर ट्रंप बनाम चीन

मिडिल-ईस्ट संघर्ष को लेकर चीन और अमेरिका एकमत नहीं हैं. 28 फरवरी को दुश्मनी शुरू होने के बाद, बीजिंग ने ईरान पर इज़राइल-अमेरिका के हमले की निंदा की. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने 28 फरवरी को विदेश मंत्री वांग यी के हवाले से कहा, “एक संप्रभु नेता की सरेआम हत्या और सत्ता परिवर्तन के लिए उकसाना अस्वीकार्य है.”

अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर बीजिंग ईरान के साथ इस तरह से शामिल होता है, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ हो, तो जटिलताएं पैदा हो सकती हैं.

ट्रंप ने बीजिंग को यह भी धमकी दी है कि अगर वह तेहरान को हथियार सप्लाई करता है, तो उस पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा. एक खुफिया आकलन में दावा किया गया था कि बीजिंग ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम की खेप भेजने की तैयारी कर रहा हो सकता है.

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हालांकि, चीन ने ऐसी रिपोर्टों को बेबुनियाद आरोप और दुर्भावनापूर्ण जोड़-तोड़ बताकर खारिज कर दिया है.

अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी को लेकर जैसे-जैसे तनाव बढ़ रहा है, चीन ने किसी भी ऐसे कदम का कड़ा विरोध किया है, जिससे ईरान में उसके रणनीतिक और ऊर्जा हितों में बाधा आ सकती हो. यह गतिरोध वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ती दरार को दिखाता है, जबकि दूसरी ओर संघर्ष विराम की मांगें भी जारी हैं.

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