हमें अंदर नहीं जाने दे रहे… ये कैसा न्याय? कोलकाता के SIR ट्रिब्यूनल से ग्राउंड रिपोर्ट – Chaos at Kolkata SIR Tribunal as Deleted Voters Seek Reentry Ahead of Polls ntc dpmx


बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में सिर्फ नौ दिन बचे हैं, लेकिन करीब 24 से 27 लाख लोग अब भी अपने वोटिंग अधिकार को लेकर असमंजस में हैं. क्योंकि उनके नाम एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. इन शिकायतों के समाधान के लिए गठित अपीलेट ट्रिब्यूनल ने सोमवार को कोलकाता के जोका स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंस्टीट्यूट में अपनी कार्यवाही शुरू की.

हालांकि, यह प्रक्रिया भ्रम और अनिश्चितता से घिरी रही. हमने देखा कि 21 वर्ष के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग अपने वोटिंग राइट्स के लिए ट्रिब्यूनल पहुंचे थे. वे चिंतित और नाराज थे. उनकी शिकायत थी कि सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. मतदाताओं ने अपने नाम वोटर लिस्ट में दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदनों जमा किए हैं, लेकिन ट्रिब्यूनल की काम करने की धीमी गति ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं.

ट्रिब्यूनल के लिए नामित सभी सेवानिवृत्त न्यायाधीश सोमवार को उपस्थित नहीं थे और कितने लोगों ने वोटर लिस्ट में अपने नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है, इसकी एक समग्र सूची भी तैयार नहीं की गई है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने आजतक से बातचीत में कहा, ‘हम ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदनों की संख्या का आकलन कर रहे हैं. इस आकलन के आधार पर निर्णय लिया जाएगा.’ कई मतदाता सुनवाई प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन की कमी से निराश होकर ट्रिब्यूनल पहुंचे थे.

लोगों को ट्रिब्यूनल में नहीं जाने दिया जा रहा

दक्षिण कोलकाता की रहने वाली अपू चक्रवर्ती ने आजतक से बातचीत में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, ‘मेरा नाम 2002 की मतदाता सूची में था, लेकिन इसे हटा दिया गया. मैं यहां समाधान की उम्मीद लेकर आई थी, लेकिन मुझे अंदर जाने तक नहीं दिया गया. अब मैं कहां जाऊं?’ अपनी बेटी के साथ ट्रिब्यूनल पहुंचे दक्षिण कोलकाता के रहने वाले एक मुस्लिम शख्स ने सवाल किया, ‘यह कैसा अन्याय है? हमें अंदर जाने तक की अनुमति नहीं दी जा रही, हमें वापस भेजा जा रहा है.’

दक्षिण 24 परगना के रहने वाले राहुल भी जोका स्थित ट्रिब्यूनल पहुंचे थे. लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि सुनवाई प्रक्रिया कैसे और कब होगी और किससे संपर्क करना है. उन्होंने आजतक से कहा, ‘मुझे कुछ भी जानकारी नहीं है. मुझे BLO ने यहां आने को कहा था. फिर भी इसको लेकर भ्रम बना हुआ है. हमें न तो सुनवाई के लिए अंदर जाने दिया गया और न ही कोई सुझाव दिया गया. गार्ड ने हमें वापस जाने के लिए कहा. यह सब कैसे सुलझेगा? क्या हम मतदान कर पाएंगे या नहीं?’

सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं के नाम हटाए जाने और इसके चुनाव प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चुनाव आयोग से सवाल किए हैं. अदालत ने कहा कि मतदान का अधिकार केवल कानूनी अधिकार ही नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक विषय भी है. जैसे-जैसे ट्रिब्यूनल की कार्यवाही आगे बढ़ रही है, उन लाखों लोगों का भविष्य भी अधर में लटका हुआ है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हें. अहम सवाल यह है कि क्या 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से इन लोगों की सुनवाई पूरी हो पाएगी?

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