अगर ईरान-अमेरिका में शांति वार्ता को लेकर कोई अंतिम समझौता होता है तो ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा यह एक बड़ा सवाल बन गया है. ईरान किसी भी हालत में अपने एनरिच्ड यूरेनियम से अपना अधिकार छोड़ना नहीं चाहता है. और अमेरिका चाहता है कि ईरान के यूरेनियम नहीं रहे. इस बीच इस विवाद में रूस एक समाधान लेकर आया है.
रूस के शीर्ष राजनयिक ने बुधवार को एक बार फिर से कहा कि मॉस्को ईरान में “एनरिच्ड यूरेनियम की समस्या को सुलझाने में भूमिका निभाने” के लिए तैयार है. लेकिन रूस ने अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय संधियों का कायदा-कानून बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए न्यूक्लियर एनरिचमेंट ईरान का अधिकार है.
दो दिन की यात्रा पर बीजिंग पहुंचे रूस के शीर्ष राजनयिक लावरोव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए रूस के रोल पर कहा, “यह भूमिका कई रूप ले सकती है, जिसमें अत्यधिक एनरिच्ड यूरेनियम को ईंधन-ग्रेड यूरेनियम में रीप्रोसेस करना, या भंडारण के लिए एक निश्चित मात्रा को रूस भेजना शामिल है. ऐसा कुछ भी जो ईरान को स्वीकार्य हो.”
एनरिच्ड यूरेनियम को ईंधन-ग्रेड यूरेनियम में रीप्रोसेस करने का मतलब मुख्य रूप से न्यूक्लियर ईंधन से बचे हुए यूरेनियम को रासायनिक तरीके से अलग करके उसे फिर से रिएक्टर में इस्तेमाल होने लायक बनाना है. यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब कोई न्यूक्लियर रिएक्टर में पहले से एनरिच्ड यूरेनियम को ईंधन रॉड्स के रूप में डाला जाता है.
रिएक्टर चलने के दौरान यह ईंधन फिशनकी प्रक्रिया से गुजरता है, जिससे ऊर्जा पैदा होती है लेकिन ईंधन धीरे-धीरे खर्च हो जाता है. खर्च हुए ईंधन में अभी भी लगभग 95-96 प्रतिशत यूरेनियम बचा रहता है, जिसमें U-235 की मात्रा बहुत कम (0.5-1 प्रतिशत के आसपास) हो जाती है.
हालांकि रूसी राजनयिक ने यह भी कहा कि अन्य देशों की तरह ईरान को भी शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम एनरिचमेंट का अधिकार है.
रूस 2015 में ईरान और छह परमाणु शक्तियों के बीच हुए उस समझौते का हिस्सा था, जिसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने और उसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए खोलने के बदले में ईरान को प्रतिबंधों से राहत देने की पेशकश की गई थी. इस समझौते के तहत, मॉस्को ने ईरान से बड़ी मात्रा में समृद्ध यूरेनियम हटाया था.
लवारोव ने बीजिंग में पत्रकारों से कहा अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान चाहे तो एनरिचमेंट प्रक्रिया को रोकने का फैसला करे या इस अधिकार को बनाए रखने पर जोर दे. रूस इस सिद्धांत पर आधारित किसी भी दृष्टिकोण को स्वीकार करेगा. उन्होंने कहा कि एनरिचमेंट का अधिकार यूनिवर्सल अधिकार है.
लवारोव ने जोर देकर कहा कि रूस और चीन मध्य-पूर्व युद्ध को समाप्त करने के लिए होने वाली बातचीत का भरपूर समर्थन करते हैं, ताकि सभी पक्ष अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार हर पक्ष के वैध अधिकारों का पूरी तरह से सम्मान करते हुए यथार्थवादी और निष्पक्ष लक्ष्यों को आगे बढ़ा सकें.
ईरान 1970 की परमाणु अप्रसार संधि का हस्ताक्षरकर्ता है, यह संधि देशों को सुरक्षा उपायों के साथ शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम चलाने का अधिकार देती है, लेकिन इसमें संवर्धन का स्पष्ट रूप से ज़िक्र नहीं है.
यूरेनियम पर फंस गई थी वार्ता
इस्लामाबाद में हुए शांति वार्ता के दौरान ईरान का परमाणु कार्यक्रम बातचीत का मुख्य बिंदू था. दोनों पक्षों के बीच रेड लाइन्स टकरा गईं. अमेरिका की मांग थी कि ईरान पूरी तरह यूरेनियम संवर्धन बंद करे, मौजूदा एनरिच्ड यूरेनियम को जिसकी मात्रा 400 किलोग्राम तक बताई गई है, इसे देश से बाहर निकाल दे या किसी और देश को सौंप दे. रूस ने यहां ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को रखने में दिलचस्पी जताई है.
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने 20 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन पर रोक की मांग की, ताकि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता न बना सके.
वहीं ईरान यूरेनियम संवर्धन को अपना अधिकार मानता है. ईरान ने 5 साल तक संवर्धन रोकने की पेशकश की लेकिन 20 साल या स्थायी बंदी को की मांग को अस्वीकार कर दिया. इसके अलावा ईरान ने स्टॉकपाइल को पूरी तरह सौंपने या हटाने से भी इनकार किया. ईरान ने कहा कि अमेरिका की मांगें ‘अनुचित’ और ‘लालची’ हैं.
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