ईरानी तेल पर अभी छूट जारी है, लेकिन यह खत्म होने जा रहा है. इस बीच, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लगभग 20 लाख बैरल कच्चे तेल से भरा एक ईरानी तेल टैंकर बिना किसी सूचना के गुजरात के पास पहुंच गया है. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिफाइनर इस माल को स्वीकार नहीं करेंगे.
इसकी बड़ी वजह है कि ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हैं. केप्लर के पोत ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, टैंकर में 28 मार्च को ईरानी कच्चा तेल भरा गया था, जबकि अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट के अनुसार, 20 मार्च से पहले टैंकरों में लदे ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी गई है.
20 मार्च को, ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति दबाव को कम करने के उद्देश्य से समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देते हुए 30 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट जारी की थी. अमेरिकी वित्त विभाग के लाइसेंस के अनुसार, इस छूट के तहत 20 मार्च से 19 अप्रैल के बीच जहाजों पर पहले से ही लदे ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति दी गई.
छूट के तहत डेडलाइन के बाद लोड किए गए माल को स्वीकार करने से खरीदारों को अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे भारतीय रिफाइनर द्वारा खेप लेने की संभावना कम हो जाती है.
अमेरिका नहीं बढ़ाएगा छूट
रिपोर्ट में कहा गया है कि छूट मिलने के बाद भारत ने हाल ही में ईरान से कुछ तेल खरीदा है, लेकिन ये खेप तय समय सीमा के भीतर खरीदी गई है. अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि वह प्रतिबंधों में छूट की अवधि नहीं बढ़ाएगा. सोमवार को वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत विफल होने के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी भी शुरू कर दी है.
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरानी तेल टैंकर डेर्या को खरीदार ढूंढने में मुश्किल हो सकती है. वैश्विक शिपिंग डेटाबेस के अनुसार, यह टैंकर अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित है और ईरान की नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी द्वारा संचालित है. केप्लर की मरीनट्रैफिक सेवा के आंकड़ों से पता चला कि बुधवार दोपहर तक जहाज गुजरात के करीब ही रहा और आने के बाद भी खरीदारी को लेकर बहुत कम हलचल रही.
बता दें अमेरिका द्वारा दी गई छूट के बाद, हाल के दिनों में ईरानी तेल ले जाने वाले कम से कम दो टैंकर और LPG ले जाने वाला एक टैंकर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे, जो लगभग सात सालों में ईरान से भारत को इस तरह की पहली ऊर्जा आपूर्ति है.
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