बॉलीवुड डीवा कंगना रनौत मंडी से सांसद हैं. राजनीति में कदम रखने के बाद वो फिल्मों में कम दिखाई दे रही हैं. चुनाव जीतने के बाद कंगना का कहना था कि वो पूरी तरह से अपने क्षेत्र और वहां की जनता के लिए काम करना चाहती हैं. हालांकि कंगना के लिए इस फील्ड में खुद को ढालना इतना आसान नहीं रहा. एक इंटरव्यू में कंगना ने संसद के अपने एक्सपीरियंस को शेयर किया है.
कंगना ने क्या कहा?
ANI संग बातचीत में एक्ट्रेस ने बताया कि शुरुआती दिनों में संसद की कार्यवाही के दौरान होने वाले शोर शराबे और बहसबाजी को देखकर वो हैरान हो गई थीं. कंगना ने कहा- मुझे लगता था मैं लड़ाकू हूं. मैं अच्छा लड़ लेती हूं. क्योंकि हमसे हमेशा ही इस तरह से सवाल-जवाब किए गए. तो वक्त होता है सोचने का. लेकिन संसद में जाकर मैं शॉक्ड हो गई थी. मैंने देखा कि वो कितने लड़ाके हैं. उनकी लड़ने की क्षमता कितनी ज्यादा है. जब संसद में आप बोलने लगते हैं कितनी हूटिंग होती है. मैं पूरी तरह से ब्लैक आउट हो जाती हूं. आपको बोलने के लिए स्ट्रगल करना पड़ता है.
”बहस के वक्त ऐसा माहौल होता है कि आप चौंक ही जाएंगे. किसी के मुंह से थूक निकल रहा है. आंखों से पानी, उनकी आंखों में गुस्सा है. वो एक दूसरे पर अटैक कर रहे हैं. लेकिन संसद में मौजूद सभी लोग जानते हैं कैसे अपनी बात सामने रखनी है. कुछ लोग काफी लंबी स्पीच देते हैं. कोई पॉइंट मिस नहीं करते. उन्हें पता होता है कैसे शोर शराबे को कंट्रोल करना है. अगर उनकी स्पीच में बाधा आती है, तो उसे कैसे डील करना है. काफी कुछ सीखने को मिला.”
कंगना ने कबूला कि शुरुआत में वो थोड़ा अनसेटल थीं. क्योंकि उन्हें पता नहीं था कहां से शुरू करना है. बहुत सारे लोग, इंफोर्मेशन थी. लेकिन उन्हें संसद में रहना कंफर्टेबल लगता है. कंगना से पूछा गया कि संसद में नेता लड़ते हैं लेकिन बाद में साथ बैठकर चाय-नाश्ता करते हैं. वहीं उनके सपोर्टर सोशल मीडिया पर एक दूसरे को अटैक करते हैं. उनकी दोस्ती खत्म हो जाती है. क्या ये प्रतिस्पर्धा बेकार की है? जवाब में एक्ट्रेस ने कहा- ऐसा नहीं है कि उनके बीच कॉम्पिटिशन नहीं होता. वो एक दूसरे के साथ शिष्टाचार के नाते चाय-समोसा खा सकते हैं. लेकिन उनकी भावनाएं बदलती नहीं है.
वर्कफ्रंट पर, कंगना की पिछली रिलीज इमरजेंसी थी. उनकी अपकमिंग फिल्मों में भारत भाग्य विधाता, सीता- द इंकार्नेशन, क्वीन 2 और तनु वेड्स मनु 3 शामिल हैं.
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