श्रीलंका के बिजली और ऊर्जा मंत्री कुमार जयकोडी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. 2024 के अंत में भ्रष्टाचार विरोधी वादे के साथ सत्ता में आई नेशनल पीपुल्स पावर (NPP) सरकार में ये पहला बड़ा इस्तीफा है. जयकोडी के साथ मंत्रालय के सचिव उदयनगा हेमापाला ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

ये इस्तीफा उस समय आया है जब राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने ‘विशेष राष्ट्रपति जांच आयोग’ की घोषणा की. अनुरा ने ये समिति सरकारी संस्था के बिजली उत्पादन के लिए किए गए कोयला आयात की जांच के लिए बनाई है.

राष्ट्रपति मीडिया डिवीजन (PMD) के मुताबिक, ये इस्तीफा कोयला आयात से जुड़े मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.

विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने पत्रकारों को बताया, ‘उन्होंने निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करने के लिए इस्तीफा दिया है. ये दो इस्तीफे एक सही जांच की सुविधा के लिए हैं ताकि वो जांच में दखलअंदाजी न कर सकें.

हेराथ ने आगे बताया कि आयोग अपनी रिपोर्ट छह महीने के भीतर राष्ट्रपति को सौंप देगा. भले ही मंत्री ने इस्तीफा दिया हो, लेकिन विपक्ष के लगाए गए घटिया कोयला आयात के आरोपों से सरकारी खजाने को कोई नुकसान नहीं हुआ है.

क्या है पूरा विवाद?

विपक्ष का आरोप है कि कोयला आयात में भारी गड़बड़ियां हुई हैं और घटिया कोयला खरीदने से राज्य को वित्तीय नुकसान हुआ है. पिछले हफ्ते ही कुमार जयकोडी के खिलाफ संसद में ‘अविश्वास प्रस्ताव’ लाया गया था. हालांकि, एनपीपी के पास भारी बहुमत होने की वजह से ये प्रस्ताव 153-49 के अंतर से गिर गया था.

अविश्वास प्रस्ताव में जयकोडी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने कोयले की खरीद में राज्य को भारी नुकसान पहुंचाया. इसके साथ ही, उनपर सरकारी खरीद प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करके राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डालने का भी आरोप लगाया गया.

जांच के घेरे में ‘लंका कोल लिमिटेड’

राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, ये विशेष आयोग ‘लंका कोल लिमिटेड’ के पिछले कई दशकों से लेकर 16 अप्रैल 2026 तक किए गए कोयला आयात की जांच करेगा. लंका कोल कंपनी की स्थापना 2008 में थर्मल पावर जनरेशन के लिए कोयले की सप्लाई के लिए की गई थी.

इस मामले में वरिष्ठ मंत्री बिमल रत्नयाके ने जयकोडी का बचाव करते हुए कहा,  ‘राज्य को कोई नुकसान नहीं हुआ है, कंपनी को नुकसान हुआ होगा. लेकिन नुकसान की लागत बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं डाली जाएगी.’

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कुमार जयकोडी ने संसद में अपना बचाव करते हुए कहा था कि वह और उनकी पार्टी एनपीपी सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. दिलचस्प बात ये है कि जयकोडी पर उनके पिछले कार्यकाल (राज्य उर्वरक निगम) के दौरान रिश्वतखोरी का आरोप भी लगाया जा चुका है.

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